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India Daily

'कहने को कुछ नहीं बचा', सुप्रीम कोर्ट से बेल न मिलने पर उमर खालिद के पिता का छलका दर्द

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया. खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

Kanhaiya Kumar Jha
'कहने को कुछ नहीं बचा', सुप्रीम कोर्ट से बेल न मिलने पर उमर खालिद के पिता का छलका दर्द
Courtesy: X/@ANI

नई दिल्ली: 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े कथित साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है. अदालत ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनके खिलाफ यूएपीए के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है. इस फैसले पर उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने गहरी निराशा जाहिर की.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने साफ कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं. अदालत ने माना कि इस स्तर पर उन्हें जमानत देना न्यायसंगत नहीं होगा. कोर्ट के अनुसार, उपलब्ध अभियोजन सामग्री दोनों आरोपियों की कथित भूमिका की ओर इशारा करती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

पिता की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि फैसला आ चुका है और अब टिप्पणी का कोई अर्थ नहीं बचता. उनकी संक्षिप्त प्रतिक्रिया उनके परिवार की निराशा और थकान को दर्शाती है, जो लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहा है.

अन्य आरोपियों को राहत

हालांकि अदालत ने खालिद और इमाम को जमानत नहीं दी, लेकिन इसी मामले में कुछ अन्य आरोपियों को राहत जरूर मिली. कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को सशर्त जमानत दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों की गंभीरता कम होना नहीं है. रिहाई के लिए 12 सख्त शर्तें तय की गई हैं.

ट्रायल में देरी पर अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुकदमे में देरी को जमानत पाने का स्वतः आधार नहीं बनाया जा सकता. अदालत ने टिप्पणी की कि ट्रायल में देरी कोई ट्रम्प कार्ड नहीं है, जिससे वैधानिक प्रावधानों को दरकिनार किया जा सके. पीठ ने यह भी कहा कि सभी आरोपियों की भूमिका समान नहीं है, इसलिए हर जमानत याचिका का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी है.

2020 दिल्ली दंगों का मामला

फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. दिल्ली पुलिस का दावा है कि यह हिंसा एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी. पुलिस ने इसे भारत की संप्रभुता पर हमला करार दिया है. इसी आधार पर कई आरोपियों पर यूएपीए और आईपीसी की गंभीर धाराएं लगाई गईं.