नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की ओर से आज दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमामल और उमर खालिद की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया. हालांकि इसी अपराध में जेल में बंद अन्य पांच आरोपी को 12 शर्तों के साथ रिहाई मिल गई. अदालत की ओर से यह तर्क दिया गया कि जमानत के लिए सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार नहीं किए जा सकते हैं.
अदालत ने इसी मामले में नामजद पांच अन्य गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को शर्त के साथ जमानत दी है. इस आदेश के पीछे तर्क दिया कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि सभी अपीलकर्ता अपराध के मामले में समान स्थिति में नहीं हैं.
दिल्ली दंगे पर फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि भागीदारी के क्रम के लिए अदालत को हर आवेदन का अलग-अलग मूल्यांकन करना होगा. अनुच्छेद 21 के तहत राज्य को लंबे समय तक प्री-ट्रायल हिरासत को सही ठहराना होगा. शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इन दोनों को ट्रायल में देरी का फायदा नहीं दिया जा सकता. बता दें कि शरजील और उमर ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इन दोनों के उपर साजिश से जुड़े सख़्त गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, या (UAPA) के तहत दर्ज मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था.
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में दिल्ली में 24 फरवरी, 2020 को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चल रहा था. इसी बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पे हुईं. यह दंगे कई दिनों तक चले, जिसमें 50 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए. इसी बीच उमर खालिद, शरजील इमाम और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित बीस लोगों पर दंगों को भड़काने की बड़ी साज़िश में कथित संलिप्तता के लिए आरोप लगाए गए थे. दिल्ली पुलिस ने शरजील और उमर की जमानत का विरोध किया. उनका कहना है कि दोनों ने राष्ट्रीय राजधानी को अस्थिर करने की कोशिश की. हालांकि उमर और शरजील का मानना है कि उन्हें फंसाया जा रहा है.