menu-icon
India Daily

गांधी जयंती 2026: जन्म से लेकर आखिरी सांस तक, इन 7 जगहों में समाई है बापू के संघर्ष की पूरी कहानी

हर साल 2 अक्टूबर को देश महात्मा गांधी की जयंती मनाता है. इस खास मौके पर जानते हैं भारत की उन 7 ऐतिहासिक जगहों के बारे में, जो गांधी जी के जीवन और आजादी की लड़ाई से गहरे जुड़ी हुई हैं.

reepu
Edited By: Reepu Kumari
गांधी जयंती 2026: जन्म से लेकर आखिरी सांस तक, इन 7 जगहों में समाई है बापू के संघर्ष की पूरी कहानी
Courtesy: Pinterest

Mahatma Gandhi Jayanti 2026: देश आज महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है, जो हर भारतीय के लिए एक खास दिन है. बापू का जीवन सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि पूरे देश की आजादी की लड़ाई का आईना है. उनके जीवन से जुड़ी कई जगहें आज भी हमें उनके संघर्ष और सादगी की याद दिलाती हैं. गुजरात से लेकर दिल्ली तक, गांधी जी ने कई शहरों में रहकर देश को आजादी की राह दिखाई. आइए जानते हैं उन 7 खास जगहों के बारे में, जो उनकी जिंदगी के अलग-अलग पड़ावों की गवाह रही हैं.

जहां हुआ था बापू का जन्म

गांधी जी की कहानी गुजरात के पोरबंदर से शुरू होती है. यहीं 2 अक्टूबर 1869 को उनका जन्म हुआ था. उनके जन्मस्थान को आज कीर्ति मंदिर के परिसर में एक स्मारक के रूप में संभालकर रखा गया है. यह जगह हमें उस दौर की याद दिलाती है, जब गांधी जी ने अभी राजनीति में कदम भी नहीं रखा था और एक साधारण बालक के रूप में बड़े हो रहे थे.

अहमदाबाद में बना पहला आश्रम

मई 1915 में गांधी जी ने भारत लौटने के बाद अपना पहला आश्रम अहमदाबाद के कोचरब इलाके में बनाया. 25 मई को शुरू हुआ यह आश्रम जून 1917 तक चला, जिसके बाद इसे साबरमती ले जाया गया. गांधी जी ने अहमदाबाद को खासतौर पर इसलिए चुना क्योंकि वे खुद गुजराती थे और यहां की भाषा में आसानी से लोगों से बात कर सकते थे.

चंपारण में सुनी किसानों की पीड़ा

साल 1917 में गांधी जी बिहार के चंपारण पहुंचे, ताकि नील की खेती करने वाले किसानों की परेशानी को करीब से समझ सकें. अंग्रेजी अधिकारियों ने उन्हें वहां से चले जाने का आदेश दिया, लेकिन गांधी जी वहीं डटे रहे और किसानों की शिकायतों की जांच की. इस दौरान उन्होंने शिक्षा और सफाई से जुड़े कई काम भी वहां शुरू करवाए.

खेड़ा में किसानों के साथ खड़े हुए बापू

साल 1918 में फसल खराब होने के बाद खेड़ा के किसानों ने जमीन के लगान में राहत मांगी थी. गांधी जी ने इस मांग का पूरा समर्थन किया और उनके आंदोलन में शामिल हो गए. खेड़ा सत्याग्रह उनके शुरुआती आंदोलनों में गिना जाता है, जहां वे स्थानीय किसानों और नेताओं के साथ मिलकर काम करते थे. इसी आंदोलन में वल्लभभाई पटेल भी उनके साथ थे.

दांडी में तोड़ा अंग्रेजों का नमक कानून

दांडी का नाम गांधी जी के मशहूर नमक सत्याग्रह से जुड़ा है. 12 मार्च 1930 को साबरमती से शुरू हुई यह यात्रा करीब एक महीने बाद 6 अप्रैल को दांडी पहुंची थी. यहां गांधी जी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर अंग्रेजी नमक कानून को खुलेआम तोड़ दिया. एक आम सी चीज नमक को उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरोध का बड़ा हथियार बना दिया.

मुंबई और सेवाग्राम में बीता संघर्ष का दौर

मुंबई के गामदेवी में स्थित मणि भवन 1917 से 1934 के बीच गांधी जी का मुख्यालय रहा, जहां से सत्याग्रह और खादी जैसे कई आंदोलन चले. 4 जनवरी 1932 को इसी भवन की छत से उन्हें गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद 1936 में गांधी जी वर्धा के पास सेवाग्राम में सादगी भरा जीवन जीने लगे, जहां उनकी कुटिया स्थानीय सामान से बनाई गई थी.

दिल्ली में बीते आखिरी दिन

9 सितंबर 1947 को गांधी जी दिल्ली के पुराने बिड़ला हाउस में आ बसे, जिसे आज गांधी स्मृति के नाम से जाना जाता है. यहीं उन्होंने अपने जीवन के आखिरी 144 दिन बिताए. 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा के लिए जाते समय इसी जगह उनकी हत्या कर दी गई, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया था.