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India Daily

34 हजार जॉब्स और 42 हजार करोड़ निवेश, यूपी-हरियाणा समेत कई राज्यों में आएगी रोजगार की बहार

ईसीएम स्कीम के तहत सरकार ने 22 नए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इससे बड़े निवेश, रोजगार सृजन, आयात निर्भरता में कमी और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत होगी.

Kanhaiya Kumar Jha
34 हजार जॉब्स और 42 हजार करोड़ निवेश, यूपी-हरियाणा समेत कई राज्यों में आएगी रोजगार की बहार
Courtesy: Gemini AI

नई दिल्ली: भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम के तहत घरेलू उत्पादन को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने 22 नए प्रस्तावों को हरी झंडी दी है. इन परियोजनाओं के जरिए देश में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए आयात पर निर्भरता घटेगी. यह पहल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने की रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है.

ईसीएम स्कीम के अंतर्गत सरकार अब तक 24 परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी थी. शुक्रवार को स्वीकृत 22 नए प्रस्ताव इस योजना को और मजबूती देते हैं. मंत्रालय के अनुसार, इन प्रस्तावों के तहत लगभग 41,863 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. इसके परिणामस्वरूप करीब 2,58,152 करोड़ रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स का उत्पादन होने की संभावना है. यह उत्पादन देश की मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता को नई ऊंचाई देगा.

रोजगार सृजन और राज्यों में विस्तार

इस निवेश से सीधे तौर पर लगभग 34,000 नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है. प्रस्तावों के तहत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी. सरकार का कहना है कि परियोजनाओं के चयन में क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा गया है, ताकि विभिन्न राज्यों में औद्योगिक विकास को समान रूप से बढ़ावा मिले.

आयात पर निर्भरता होगी कम

भारत हर साल 28 अरब डॉलर से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स का आयात करता है. इसमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड जैसे अहम हिस्से शामिल हैं. घरेलू स्तर पर कंपोनेंट्स के निर्माण से आयात पर निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी. मंत्रालय के मुताबिक, नए प्रस्तावों के जरिए मोबाइल, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर से जुड़े कंपोनेंट्स भारत में ही तैयार किए जाएंगे.

बड़ी कंपनियों की भागीदारी

इन परियोजनाओं में घरेलू और विदेशी दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी दिग्गज कंपनियों को भी मंजूरी दी गई है. सैमसंग भारत में मोबाइल फोन निर्माण से जुड़े कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले मॉड्यूल का उत्पादन करेगी. इससे देश में हाई वैल्यू कंपोनेंट्स के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और तकनीकी क्षमताएं मजबूत होंगी.

पीसीबी निर्माण और भारत का वैश्विक लक्ष्य

इंडिया सर्किट प्राइवेट लिमिटेड, वाइटल इलेक्ट्रॉनिक्स, सिगनम इलेक्ट्रॉनिक्स और बीपीएल जैसी कंपनियां देश में पीसीबी का निर्माण करेंगी. वहीं एटीएल बैटरी टेक्नोलॉजी और डिक्सन इलेक्ट्रोकनेक्ट जैसे प्रस्ताव भी मंजूर किए गए हैं. मंत्रालय का मानना है कि कंपोनेंट्स निर्माण में तेजी से भारत केवल मोबाइल फोन ही नहीं, बल्कि संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बन सकेगा.