चुनाव आयोग ने अपने ऑनलाइन पोर्टल 'ECINET' पर मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए एक विवादित बदलाव को वापस ले लिया है. आयोग ने मंगलवार और बुधवार की मध्यरात्रि को उन राज्यों के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी विशेष घोषणा को हटा दिया है, जहां संशोधन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. 26 सितंबर को आयोग ने घोषणा की थी कि गैर-एसआईआर अवधि में 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों के तहत तय फॉर्म ही लागू रहेंगे.
यह कदम मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया, जिसमें खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म-6 में बिना कानूनी संशोधन इस घोषणा को जोड़ने पर कड़ा एतराज जताया था. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के अनुसार, केवल केंद्रीय कानून मंत्रालय ही मतदाता फॉर्मों में संशोधन या बदलाव करने का कानूनी अधिकार रखता है. चुनाव आयुक्तों ने इस असंवैधानिक बदलाव को अवैध करार दिया था.
फॉर्म-6 के सेक्शन जे और के (Sections J & K) के बीच ऑनलाइन एक नया घोषणापत्र जोड़ा गया था. इसमें नए मतदाताओं से यह जानकारी मांगी गई थी कि क्या वे या उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछली एसआईआर प्रक्रिया का हिस्सा थे? यदि हाँ, तो उन्हें अपना बूथ और सीरियल नंबर प्रदान करना था. दिलचस्प बात यह थी कि ऑनलाइन जमा किए जाने वाले फॉर्म में यह विकल्प था, लेकिन डाउनलोड के लिए उपलब्ध पीडीएफ फॉर्म में यह दर्ज नहीं था.
वर्ष 2025 में जब बिहार में चुनावी नामावलियों का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू हुआ था, तब आयोग ने फॉर्म-6 के साथ भरे जाने वाले एक अलग घोषणापत्र की शुरुआत की थी. हालांकि, उस समय मूल फॉर्म-6 में संशोधन नहीं किया गया था. आयोग के हालिया कदम के बाद उन राज्यों में फॉर्म-6 अब अपने मूल और वैधानिक स्वरूप में लौट आया है जहां एसआईआर पूरा हो चुका है, जबकि जहां प्रक्रिया जारी है वहां यह पोर्टल पर फिलहाल दिख रहा है.