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'कुछ भी बन जाना, बस बुर्के वाली मत बनना', नागपुर में लव जिहाद पर फूटा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का गुस्सा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नागपुर में 'लव जिहाद' को 'धीमा जहर' बताया है. उन्होंने सनातनी बेटियों को जागरूक रहने की सलाह देते हुए देशभर में इसके खिलाफ सख्त कानून बनाने की पुरजोर मांग की है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर अपने बेबाक बयानों से देश की राजनीति और समाज में हलचल पैदा कर देते हैं. हाल ही में चार बच्चों वाले बयान के बाद अब उन्होंने महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में 'लव जिहाद' के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है. शास्त्री ने इसे एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताया और सनातनी मूल्यों की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होने का आह्वान किया है. उनके इस संबोधन ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है.

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने भाषण में 'लव जिहाद' को एक ऐसा 'धीमा जहर' करार दिया है जो धीरे-धीरे पूरे देश की रगों में फैल रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि इसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने आंकड़ों का जिक्र करते हुए दावा किया कि केवल मध्य प्रदेश में एक साल में 280 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं. उनके अनुसार, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह समाज को भीतर से खोखला करने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है.

महानगरों में बेटियों पर गहराता संकट 

शास्त्री के अनुसार यह समस्या अब केवल गांव या छोटे कस्बों तक सीमित नहीं है. मुंबई और नागपुर जैसे महानगरों में भी हमारी बहनों और बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधी अपना नाम और भेष बदलकर मासूम लड़कियों को अपने जाल में फंसाते हैं. शहरी इलाकों में बढ़ती ऐसी घटनाओं को उन्होंने संस्कृति पर प्रहार बताया. उनका मानना है कि जागरूक न होने के कारण कई परिवार इस गंभीर समस्या का शिकार हो रहे हैं.

प्रेम और संस्कृति के बीच संतुलन बनाने पर दिया जोर

बाबा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे प्रेम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रेम के नाम पर अपनी धार्मिक पहचान और मूल्यों का उल्लंघन करना अपराध है. उन्होंने बेटियों से अपील की कि वे प्रेम और धोखे के बीच के अंतर को समझें. शास्त्री ने कहा कि धर्म-विरोधी ताकतें लगातार हिंदू संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं. उनका संकल्प है कि वे सनातनी बेटियों को जागरूक करेंगे ताकि वे अपनी विरासत और आत्मसम्मान के साथ कभी समझौता न करें.

कार्यक्रम में उन्होंने एक बेहद विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि उनकी प्रार्थना है कि बेटियां कुछ भी बनें, लेकिन 'बुर्का पहनने वाली महिला' न बनें. उनका इशारा धर्म परिवर्तन और उसके बाद आने वाली चुनौतियों की ओर था. उन्होंने समाज को सचेत करते हुए कहा कि जागरूकता फैलाना अब अनिवार्य हो गया है. वे चाहते हैं कि समाज का हर वर्ग इस खतरे को पहचाने और अपनी आने वाली पीढ़ियों को सही संस्कारों के माध्यम से सुरक्षा कवच प्रदान करने का काम करे.

राष्ट्रीय स्तर पर सख्त कानून बनाने की मांग

अंत में शास्त्री ने महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से इस विषय पर कठोर रुख अपनाने की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की तरह ही अन्य राज्यों में भी सख्त कानून होने चाहिए. उनकी मांग है कि केंद्र सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत कानून बनाना चाहिए. शास्त्री का मानना है कि जब तक सजा का डर नहीं होगा, तब तक पहचान छुपाकर बेटियों के साथ छल करने वाली ताकतों को रोका नहीं जा सकेगा.