नई दिल्ली: एक तरफ जहां ईरान और अमेरिका के बीच गहराता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं भारत के लिए व्यापारिक गलियारे से एक बहुत अच्छी खबर आई है. लंबे समय तक चली वार्ता के बाद, भारत और न्यूजीलैंड सोमवार 27 अप्रैल को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं. यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों की एक नई पटकथा लिखेगा, जिससे भविष्य में व्यापारिक लाभ और निवेश की व्यापक संभावनाएं पैदा होंगी.
यह समझौता बीते साल दिसंबर में हुई सफल बातचीत का परिणाम है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे. इस एफटीए का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारतीय कंपनियों को अब न्यूजीलैंड के बाजारों में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के प्रवेश मिलेगा. इससे भारतीय माल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और ओशिनिया क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी.
निवेश और रोजगार के सुनहरे अवसर
डील के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर का भारी-भरकम विदेशी निवेश आने की उम्मीद जताई गई है. आर्थिक लाभ के अलावा, यह समझौता भारतीय पेशेवरों के लिए भी खुशखबरी लेकर आया है. अब उनके लिए अस्थायी रोजगार वीजा प्राप्त करना पहले से कहीं अधिक सरल हो जाएगा. इसके साथ ही, भारत से दवाओं और महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों के निर्यात में भी आने वाली बाधाएं दूर होंगी, जिससे इस सेक्टर की भारतीय कंपनियों को सीधा वैश्विक लाभ पहुंचेगा.
समझौते के अनुसार, न्यूजीलैंड से आने वाले लगभग 95% उत्पादों पर भारत अपने टैरिफ को या तो पूरी तरह खत्म कर देगा या काफी कम कर देगा. इनमें विशेष रूप से ऊन, कोयला, वाइन और एवोकाडो जैसे फल शामिल हैं. हालांकि, भारत ने अपने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है. डेयरी उत्पाद, खाद्य तेल और सब्जियों जैसे कृषि आधारित संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है ताकि घरेलू कृषि उद्योगों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और वे सुरक्षित रहें.
भारत और न्यूजीलैंड ने आगामी पांच वर्षों के भीतर अपने आपसी व्यापार को 5 अरब डॉलर के पार ले जाने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. पीयूष गोयल ने रविवार को आश्वस्त किया कि यह समझौता घरेलू उद्यमियों, विशेषकर आगरा के चमड़ा निर्यातकों के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलेगा. यह डील न केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित है, बल्कि यह सेवा क्षेत्र और तकनीकी सहयोग में भी दोनों देशों के बीच गहरी रणनीतिक साझेदारी को काफी मजबूत करने वाली है.
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी वार-पलटवार और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण भारतीय निर्यातक काफी समय से दबाव महसूस कर रहे थे. ऐसे माहौल में न्यूजीलैंड के साथ हुआ यह समझौता उन्हें एक नया और सुरक्षित बाजार उपलब्ध कराएगा. यह एफटीए साबित करता है कि वैश्विक तनाव के बीच भी भारत अपनी आर्थिक प्रगति की गति को बरकरार रखने के लिए सक्रिय है. यह साझेदारी आने वाले समय में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती और स्थिरता प्रदान करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी.