मॉनसून अभी तक उत्तर भारत पहुंचा नहीं है. सूरज का ताप हर दिन बढ़ता जा रहा है. 45 डिग्री से ज्यादा तापमान तो सामान्य हो गया है और अब अधिकतम तापमान 50 डिग्री को भी पार कर रहा है. नतीजा यह हो रहा है कि कई राज्यों में पानी का संकट आ गया है. एक तरफ रेमल चक्रवात की वजह से मणिपुर और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के कुछ इलाकों में तबाही आ रही है, दूसरी तरफ दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई राज्यों में पीने के पानी का ही संकट आ गया है. दिल्ली सरकार ने इसके लिए इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है और पानी की बर्बादी करने वाले का चालान काटने का ऐलान कर दिया है. इस बीच हरियाणा और दिल्ली के बीच यमुना के पानी को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है. दिल्ली, मुंबई के कई इलाकों में पानी की सप्लाई टैंकर से ही होती है और इन जगहों पर अब टैंकर भी कम ही आ रहा है. टैंकर कम आने से हजारों लोग पीने के पानी के लिए तरस गए हैं.
एक तरफ दिल्ली में कल का अधिकतम तापमान 52 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया गया है. दूसरी तरफ, पानी का संकट सामने खड़ा है. अब दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी आज वजीराबाद बैराज पहुंचीं और वहां पानी की स्थिति का जायजा लिया. इसके बाद आतिशी ने कहा, 'दिल्ली पानी की सप्लाई के लिए यमुना पर निर्भर है जो कि हरियाणा के रास्ते यहां तक आती है. आज वजीराबाद तालाब में पानी 674 फीट होना चाहिए था. मौजूदा समय में यमुना का जलस्तर 370.3 फीट पर है. पिछले साल इसी समय यह 374.5 फुट पर था. जब हरियणा से पानी ही कम आ रहा है तो प्लांट पानी की सप्लाई कैसे करेंगे. हमने इसके लिए हरियाणा की सरकार और केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है कि दिल्ली को उसके हिस्से का पानी मिलना चाहिए क्योंकि कई इलाकों में पानी की कमी हो रही है.'
#WATCH | Delhi Minister Atishi inspects Wazirabad Water Treatment Plant amid water scarcity in some areas of the national capital. pic.twitter.com/CcA92BD4lM
— ANI (@ANI) May 30, 2024Also Read
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पहाड़ों वाले राज्य हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला बीते कुछ सालों में जल संकट की वजह से खूब चर्चा में रहा है. इस बार भी टूरिस्ट्स के लिए मशहूर इस शहर में पानी की कमी हो गई है. साल 2018 में भी शिमला का हाल कुछ ऐसा ही हुआ था और 10 दिनों तक पानी के संकट से जूझना पड़ा था. इस साल हीटवेव के चलते पहाड़ों वाले इस शहर का तापमान 31.7 डिग्री तक पहुंच गया है. इससे पहले, साल 2010 में 32.7 डिग्री तक तापमान पहुंचा था.
शिमला में एक दिन के लिए पानी की सप्लाई 39.11 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) तक होती है. बुधवार को यह सप्लाई घटकर 33 MLD तक आ गई. नतीजा यह हुआ कि शहर के कई हिस्सों में लोग पानी के लिए बेहाल हो गए हैं. सतलुज जल प्रबंधन निगम लिमिटेड के जनरल मैनेजर राजेश कश्यप ने कहा, 'भीषण गर्मी के कारण पानी की कमी होती जाज रही है. सप्लाई अभी भी कंट्रोल में है और हमें उम्मीद है कि जल्द ही बारिश होगी और पानी का संकट दूर होगा.'
🚰पाणी बचतीचे उपाय अंगीकारणे सहज शक्य आहे. कृपया पाण्याचा काटकसरीने वापर करा आणि शक्य तेवढी पाणी बचत करा.
— माझी Mumbai, आपली BMC (@mybmc) May 25, 2024
💧बृहन्मुंबई महानगरपालिकेच्या प्रयत्नांना सहकार्य करावे, ही नम्र विनंती.
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🚰It's easy to adopt water-saving measures. Save as much water as possible.
💧Use water… pic.twitter.com/O5qPcNYXfq
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई समेत राज्य के कई जिलों में पानी का संकट गहराता जा रहा है. भीषण गर्मी और अब तक बारिश ने होने के कारण बांधों का भंडारण तेजी से कम हो रहा है. 22 मई तक जो जल भंडारण पिछले साल 34.35 पर्सेंट तक था वह घटकर 24.04 पर्सेंट पर आ गया. कई जिलों के बांध ऐसे भी हैं जिनमें 10 पर्सेंट से भी कम पानी बचा है. ऐसे में अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो ये जिले सूखे की चपेट में आ जाएंगे.
लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों का सहारा लिया जा रहा है. हर दिन टैंकरों की संख्या बढ़ती जा रही है. राज्य में हर दिन कम से कम साढे़ तीन हजार टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है. इसमें पहाड़ी इलाकों में लगभग 600 टैंकर और लगभग 3 हजार टैंकर गांवों में भेजे जा रहे हैं.
#WATCH | Kerala: Rain lashes several parts of Kottayam district
— ANI (@ANI) May 30, 2024
As per IMD, Southwest Monsoon has set in over Kerala and advanced into most parts of Northeast India today, 30th May. pic.twitter.com/0ersoKXonI
इस बीच अच्छी खबर यह है कि मॉनसून केरल के तट तक पहुंच गया है. दूसरी तरफ, रेमल चक्रवात के चलते पूर्वोत्तर और पूर्व के राज्यों में बारिश हुई है. तमिलनाडु और केरल में मॉनसून की बारिश शुरू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि एक हफ्ते के अंदर यह बारिश राजधानी दिल्ली तक पहुंच जाएगी. अगर ऐसा होता है तो दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों को भी पानी के संकट से राहत मिल जाएगी.