लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश अब वामपंथी उग्रवाद से लगभग मुक्त हो चुका है और बस्तर जैसे इलाकों में तेजी से विकास हो रहा है. शाह ने साफ किया कि सरकार विकास और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर काम कर रही है. इस दौरान उन्होंने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा और कहा कि अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर में अब नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है. उन्होंने बताया कि हर गांव में स्कूल और राशन की दुकानों की व्यवस्था की गई है. पहले जहां विकास नहीं पहुंच पाता था, अब वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. शाह के अनुसार, इससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है और क्षेत्र में शांति का माहौल बना है.
"1947 से पहले इस देश के ट्राइबल्स बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, रानी दुर्गावती, मुर्मु बंधुओं को अपना आदर्श मानते थे. वही आदिवासी 1970 आते-आते माओ को अपना हीरो मानने लगा.
— SansadTV (@sansad_tv) March 30, 2026
ये परिवर्तन क्यों हुआ?
ये परिवर्तन विकास की कमी या अन्याय के कारण नहीं हुआ. कठिन भूगोल और स्टेट की अनुपस्थिति… pic.twitter.com/7lWY0NajOV
गृह मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जो भी हथियार उठाएगा, उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा. उन्होंने इसे सरकार की स्पष्ट नीति बताया. शाह ने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और बेहतर रणनीति के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से नियंत्रण स्थापित किया गया है. इसके साथ ही विकास योजनाओं को भी समान रूप से लागू किया गया है, जिससे समस्या की जड़ पर काम हुआ है.
शाह ने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में विकास नहीं पहुंच पाया. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों ने इन इलाकों को नजरअंदाज किया, जिससे नक्सलवाद को बढ़ावा मिला. उन्होंने यह भी कहा कि अब मौजूदा सरकार ने इस स्थिति को बदलने का काम किया है.
अपने भाषण में शाह ने नक्सलवाद की विचारधारा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इसे सही ठहराना गलत है और इसकी तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से करना उचित नहीं है. शाह ने कहा कि अब देश में कानून का राज है और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है.