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India Daily

चीफ जस्टिस की विवादित टिप्पणी से जन्मी कॉकरोच जनता पार्टी, तीन दिन में जुड़े 20 लाख लोग, इंस्टा पर हुए 50 लाख फॉलोअर्स

सुप्रीम कोर्ट की 'कॉकरोच' टिप्पणी से नाराज बेरोजगार युवाओं ने सोशल मीडिया पर मजाक में 'कॉकरोच जनता पार्टी' बनाई थी जो 20 लाख से ज्यादा सदस्यों के साथ देश में बेरोजगारी के खिलाफ बड़ा डिजिटल आंदोलन बन गई है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
चीफ जस्टिस की विवादित टिप्पणी से जन्मी कॉकरोच जनता पार्टी, तीन दिन में जुड़े 20 लाख लोग, इंस्टा पर हुए 50 लाख फॉलोअर्स
Courtesy: @CJP_2029

नई दिल्ली: इंटरनेट पर इन दिनों 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम का एक अनोखा और मजेदार ट्रेंड खूब वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर मजाक-मजाक में शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के बेरोजगार और सोशल मीडिया पर एक्टिव युवाओं की आवाज बन चुका है. मजाक में बनाई गई इस पार्टी ने अब बड़ा रूप ले लिया है. इस पार्टी से 3 दिन में तकरीबन 20 लाख लोग जु़ड़ गए हैं.

कैसे शुरू हुआ पूरा बवाल

इस पूरे बवाल की शुरुआत 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई के दौरान हुई थी. दरअसल चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कथित तौर पर कुछ युवाओं की तुलना 'कॉकरोचों' से कर दी थी. उन्होंने कहा कि कुछ बेरोजगार युवा नौकरी न मिलने पर सोशल मीडिया एक्टिविस्ट, मीडिया क्रिटिक या आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं और इंटरनेट पर दूसरों को निशाना बनाने लगते हैं.

इस बयान से सोशल मीडिया पर युवाओं का गुस्सा भड़क गया था. हालांकि बाद में चीफ जस्टिस ने सफाई दी कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया और वे सिर्फ फर्जी डिग्री लेकर वकालत में आने वाले लोगों की बात कर रहे थे. लेकिन तब तक बात हाथ से निकल चुकी थी.

मजाक में बनाई थी पार्टी

इस घटना के अगले ही दिन यानी 16 मई को कुछ यूजर्स ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर मजाक में 'कॉकरोच जनता पार्टी' बना दी और सदस्यता के लिए एक गूगल फॉर्म शेयर कर दिया. उन्हें लगा कि यह एक छोटा-मोटा मजाक बनकर रह जाएगा लेकिन देखते ही देखते सिर्फ तीन दिनों में 20 लाख से ज्यादा लोग इससे जुड़ गए. पार्टी के इंस्टाग्राम पेज पर 40 लाख से ज्यादा और एक्स अकाउंट पर करीब 1 लाख फॉलोअर्स हो गए हैं.

भले ही यह कोई असली राजनीतिक पार्टी नहीं है लेकिन युवा इसे एक डिजिटल आंदोलन की तरह ले रहे हैं. इसके जरिए वे बेरोजगारी, सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक और युवाओं पर बढ़ते दबाव के खिलाफ मीम्स और वीडियो बनाकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं.

कौन है इस आंदोलन के पीछे?

इस आंदोलन के पीछे 30 साल के अभिजीत दिपके हैं जो पहले आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया वॉलेंटियर रह चुके हैं और फिलहाल बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक मजाक को पूरे देश से इतना बड़ा रिस्पॉन्स मिलेगा.

पार्टी की वेबसाइट पर इसके मजेदार नियम लिखे गए हैं- जैसे आवेदक का बेरोजगार होना, दिनभर ऑनलाइन रहना और इंटरनेट पर अपनी भड़ास निकालना आना जरूरी है. इस मजाक के बीच पार्टी ने एक गंभीर 5 सूत्रीय घोषणापत्र भी जारी किया है, जिसमें बेरोजगारी, पेपर लीक, और मीडिया पर नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया है. महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद जैसे बड़े नेताओं और हॉटमेल के को-फाउंडर सबीर भाटिया ने भी इस ट्रेंड का समर्थन किया है. जानकारों का मानना है कि यह भले ही एक मजाक हो लेकिन यह देश के 'जेन-जी' युवाओं की असली हताशा और गुस्से को दिखाता है.