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ससुर के साथ कर दी थी राजनीति, मोदी के खिलाफ छेड़ी मुहिम, पढ़िए चंद्रबाबू नायडू का ट्रैक रिकॉर्ड

Chandrababu Naidu Political Career: तेलुगु देशम पार्टी इस समय केंद्र में किंग मेकर की भूमिका में है. उसने 16 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की है. ऐसे में चंद्रबाबू नायडू का कद बढ़ गया है. उनकी राजनीतिक जर्नी बड़ी उलटफेरों वाली रही हैं. आइए जानते हैं कि उनका पॉलिटिकल करियर कैसा रहा है.

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Gyanendra Tiwari
Chandrababu Naidu
Courtesy: Social Media

Chandrababu Naidu Political Career: लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं. किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 292 सीट हासिल करके बहुमत के आंकड़े को पार किया है. इस बार बीजेपी को अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार चलानी होगी. सहयोगियों में सबसे बड़ी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) है. ऐसे में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू का कद बढ़ गया है. वो इस समय दिल्ली की कुर्सी के किंग मेकर हैं. इस किंग मेकर का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है. आइए जानते हैं कि कैसे रहा है चंद्रबाबू नायडू का राजनीतिक सफर.

एक ओर चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 135 सीटें हासिल करके वापसी की है. दूसरी ओर लोकसभा चुनाव में 16 सीटें जीतकर केंद्र की सत्ता में किंगमेकर बनकर उभरे हैं. ऐसे में बीजेपी को केंद्र की सत्ता चलाने के लिए चंद्रबाबू नायडू का ख्याल रखना पड़ेगा. थोड़ी भी दरार पड़ने पर नायडू एनडीए से अलग हो सकते हैं. क्योंकि वो ऐसा पहले भी कर चुके हैं. 2018 में उन्होंने एनडीए से अलग होकर पीएम मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. उन्होंने अपने ससुर नंदमुरी तारक राव (एनटीआर) के खिलाफ पार्टी के भीतर तख्तापलट करके मुख्यमंत्री पद की कुर्सी हथिया ली थी. आइए उनके राजनीतिक सफर को जानने की कोशिश करते हैं.      

1978 में पहली बार बने विधायक 

चंद्रबाबू नायडू के राजनीतिक करियर की शुरुआत 1970 के दशक से होती है. वह 1978 में वो आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल करके विधायक बनते हैं. यहीं से उनकी राजनीति में फुल एंट्री मानी जाती है. आगे चलकर वो अपनी ससुर की पार्टी टीडीपी यानी तेलुगु देशम पार्टी में शामिल हो जाते हैं.

सरकार बचाकर जीता ससुर का विश्वास   

टीडीपी की स्थापना चंद्रबाबू नायडू के ससुर नंदमुरी तारक रामा राव (NT Rama Rao) ने की थी. वो अपने ससुर की खूब आलोचना किया करते थे. लेकिन साल 1984 में जब कांग्रेस ने उनके ससुर को सत्ता से हटाने की कोशिश की तो नायडू ने अपने ससुर की कुर्सी बचाकर उनका विश्वास जीता. इसके बाद एनटीआर ने उन्हें पार्टी का महासचिव बना दिया. 1989 में वो टीडीपी से लड़े और विधायक बने. इस कार्यकाल में उन्होंने अपनी छवि एक हाई प्रोफाइल नेता के रूप में बना ली थी.

ससुर के खिलाफ किया तख्तापलट और बन गए सीएम   

साल 1994 में हुए विधानसभा चुनाव में टीडीपी को बहुमत मिलता है. चंद्रबाबू नायडू के ससुर मुख्यमंत्री बनते हैं. इस दौरान नायडू पार्टी के अंदर तख्तापलट की कोशिश में लगे थे और 1995 में उन्होंने अपने ससुर के खिलाफ मोर्चा खोलकर खुद को आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया. इस तरह वो टीडीपी के प्रमुख बन गए.

NDA में थे शामिल फिर भी गोधरा दंगों पर मोदी से मांगा इस्तीफा

साल 1998 से 2004 तक चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार को समर्थन दिया था. अटल बिहारी वाजपेयी से नायडू के अच्छे रिश्ते थे. साल 2002 में हुए गुजरात में हुए गोधरा कांड के बाद एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद उन्होंने राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफा देने के लिए कहा था.

2004 में करारी हार और NDA से हुए अलग

2004 में एनडीए को लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए से नाता तोड़कर साल 2009 में  बीआरएस (TRS) और वाम दलों के साथ मिलकर एक नया गठबंधन बनाया था.  हालांकि, 2014 में वो एक बार फिर से एनडीए में शामिल हो गए थे.

2018 में आंध्र प्रदेश को नहीं मिला स्पेशल स्टेटस तो मोदी के खिलाफ खोला मोर्चा   

2018 में उन्होंने मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. दरअसल, उन्होंने आंध्र प्रदेश को स्पेशल राज्य का दर्जा देने की मांग की थी. राज्य को स्पेशल दर्जा ने मिलने पर एनडीए से नाता तोड़कर उन्होंने पीएम मोदी के मोर्चा खोल दिया था. गैर बीजेपी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से समर्थन प्राप्त करके वो 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को करारी हार देने चाहते थे. लेकिन 2019 में बीजेपी ने अकेले ही 303 सीटें हासिल करके बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया था.

2019 में करारी हार और फिर गए जेल

2019 में आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में टीडीपी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. इस हार के बाद उनका ग्राफ गिरने लगा था. 2023 में उन्हें जेल तक जाना पड़ा. चंद्रबाबू नायडू को स्किल डेवलपमेंट घोटाले में राज्य की सीआईडी ने गिरफ्तार किया था. 2 महीने उन्होंने जेल में काटे. वापस आने के बाद लोकसभा चुनाव 2024 और आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने फिर से एनडीए का दामन थाम लिया.

चुनाव से पहले जीत NDA में हुए शामिल 

2024 में गठबंधन का दामन थामने के बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त वापसी की. 175 सीटों में से टीडीपी ने 135 सीटें हासिल की. लोकसभा चुनाव में टीडीपी ने 25 में से 16 सीटों पर जीत हासिल की.  इस जीत ने उन्हें किंगमेकर बना दिया.

दिल्ली के गद्दी के किंग मेकर   

इस समय चंद्रबाबू नायडू सत्ता की वो चाभी जो ये तय कर सकते हैं कि दिल्ली की सत्ता पर कौन राज करेगा. हालांकि, एनडीए गठबंधन की बैठक में घटक दलों ने पीएम मोदी को अपना नेता चुन लिया है. उन्होंने साफ कह दिया है कि केंद्र में एनडीए की सरकार बनेगी. एनडीए गठबंधन जल्द ही राष्ट्रपति के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है.

नई सरकार में चंद्रबाबू नायडू के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी किंग मेकर की भूमिका में हैं. उनकी पार्टी जेडीयू को 12 सीटें मिली हैं. केंद्र सरकार में दोनों पार्टियों का कद बढ़ गया है. सूत्रों की मानें तो दोनों ने मनमुताबिक मंत्रालयों की मांग की है.