नई दिल्ली: घरेलू विमानन क्षेत्र में एक अहम बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने हवाई किराए पर लगाई गई अस्थायी सीमा को समाप्त कर दिया है. यह सीमा दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में आई व्यापक बाधा के बाद लागू की गई थी. अब विमानन क्षेत्र में परिचालन पूरी तरह सामान्य हो गया है और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी हल हो चुके हैं. नया नियम 23 मार्च 2026 से प्रभावी होगा.
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 20 मार्च के अपने आदेश में बताया कि 6 दिसंबर 2025 से यह सीमा लागू थी. इसका उद्देश्य टिकटों की कीमतों में असामान्य उछाल को रोकना और सीमित उड़ान क्षमता के दौरान यात्रियों के हितों की रक्षा करना था. उस समय दूरी के आधार पर अधिकतम किराया 18 हजार रुपये तक तय किया गया था.
मंत्रालय के अनुसार अब विमानन क्षेत्र के हालात पूरी तरह स्थिर हो चुके हैं. उड़ानों की क्षमता बहाल हो गई है और परिचालन सामान्य हो गया है. स्थिति की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि अब किराया सीमा जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है. यह सीमा 23 मार्च 2026 से हटा ली जाएगी.
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण विमानन ईंधन की कीमतों में तेजी आई है. रॉयटर्स के अनुसार एयरलाइंस ने सरकार को चेताया था कि अगर किराया सीमा नहीं हटाई गई तो उन्हें मार्गों को कम करना पड़ सकता है. एचएसबीसी के विश्लेषकों के मुताबिक ईंधन की कीमत में एक डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से इंडिगो का वार्षिक ईंधन बिल तीन अरब रुपये बढ़ जाता है.
इंडिगो और एयर इंडिया का घरेलू बाजार में 90 फीसदी से अधिक हिस्सा है. हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध के कारण इन दोनों एयरलाइंस को यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए लंबे मार्गों से उड़ानें संचालित करनी पड़ रही हैं. इससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत दोनों बढ़ गई है. इस महीने की शुरुआत में कई एयरलाइंस ने ईंधन अधिभार भी लागू किया है.
किराया सीमा हटाने के साथ ही सरकार ने एयरलाइंस को मूल्य अनुशासन बनाए रखने का निर्देश दिया है. मंत्रालय ने कहा कि किराए उचित, पारदर्शी और बाजार के अनुकूल होने चाहिए. यात्रियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. अत्यधिक बढ़ोतरी पर सख्त नजर रखी जाएगी. हवाई किराए के रुझान पर वास्तविक समय में निगरानी जारी रहेगी.