देश में सड़क संपर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को दिल्ली और उत्तर प्रदेश से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे दी. इन परियोजनाओं पर कुल 14,115 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी. इनमें राजधानी दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज से जोड़ने वाली सुरंग और उत्तर प्रदेश में कानपुर से कबरई तक आधुनिक एक्सेस कंट्रोल राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण शामिल है. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से यातायात और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय राजमार्ग-148AE पर लगभग 8.1 किलोमीटर लंबी छह लेन सुरंग परियोजना को मंजूरी दी है. यह सुरंग द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी. इस परियोजना की अनुमानित लागत 6,969.67 करोड़ रुपये तय की गई है. परियोजना का उद्देश्य राजधानी में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना, यात्रा समय घटाना और विभिन्न हिस्सों के बीच सुगम आवागमन सुनिश्चित करना है. इसके पूरा होने से दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में सड़क नेटवर्क को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
Cabinet approves road projects in Delhi and Uttar Pradesh worth Rs 14,115 cr: Union Minister Ashwini Vaishnaw.
— Press Trust of India (@PTI_News) July 1, 2026
Cabinet clears 6-lane Dwarka tunnel project worth Rs 6,970 cr to decongest traffic in Delhi: Union Minister Ashwini Vaishnaw. pic.twitter.com/Lmqgz4nj8W
मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के कानपुर-कबरई खंड को भी स्वीकृति प्रदान की है. करीब 117.7 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को चार और छह लेन वाले एक्सेस कंट्रोल हाईवे के रूप में विकसित किया जाएगा. इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145.14 करोड़ रुपये है. सरकार का कहना है कि इस सड़क के बनने से औद्योगिक गतिविधियों, माल परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र और कानपुर के बीच बेहतर सड़क संपर्क विकसित होने से यात्रियों और व्यवसायों दोनों को लाभ मिलने की संभावना है.
इन नई मंजूरियों के बीच सरकार की हालिया रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि देश की कई बड़ी आधारभूत परियोजनाएं लागत वृद्धि और समयबद्ध क्रियान्वयन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं. मई 2026 तक 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 1,987 परियोजनाओं की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, इनकी कुल अनुमानित लागत में लगभग 5.4 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. संशोधित लागत 42.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि अब तक लगभग 51 प्रतिशत खर्च किया जा चुका है. रिपोर्ट के अनुसार 817 परियोजनाएं 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति हासिल कर चुकी हैं.
कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) कार्यक्रम को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई. यह ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सरकार ने इस कार्यक्रम को अभी प्रयोगात्मक चरण में बताया है. हालांकि केंद्र सरकार पहले ही इन रिपोर्टों का खंडन कर चुकी है और स्पष्ट किया है कि ऐसी खबरें अटॉर्नी जनरल की दलीलों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करतीं. कानून एवं न्याय मंत्रालय ने भी संबंधित दावों को पूरी तरह गलत बताया था.