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India Daily

भारत-पाक की 117 हस्तियों ने पीएम मोदी और शहबाज को लिखी चिट्ठी, की रिश्तों में नरमी की अपील

भारत और पाकिस्तान की 117 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को पत्र लिखकर संवाद बहाल करने की अपील की है. वहीं भाजपा नेता रविंदर रैना ने आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए इस मांग पर सवाल खड़े किए.

KanhaiyaaZee
भारत-पाक की 117 हस्तियों ने पीएम मोदी और शहबाज को लिखी चिट्ठी, की रिश्तों में नरमी की अपील
Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने शांति और संवाद की पहल करते हुए एक संयुक्त पत्र जारी किया है. इस पत्र को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित किया गया है. हस्ताक्षरकर्ताओं ने दोनों देशों के नेतृत्व से आग्रह किया है कि वे टकराव और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर बातचीत का रास्ता अपनाएं.

पत्र में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के दो प्रमुख देशों के बीच लगातार बनी हुई कटुता का असर केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव क्षेत्रीय विकास, आर्थिक सहयोग और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ता है. हस्तियों का मानना है कि संवाद ही ऐसा माध्यम है, जिससे स्थायी शांति और भरोसे का वातावरण तैयार किया जा सकता है.

दोनों देशों की प्रमुख हस्तियों ने जताई चिंता

इस पहल में भारत और पाकिस्तान के कुल 117 लोगों ने हिस्सा लिया है. भारत की ओर से 61 हस्तियों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और राजद नेता मनोज झा जैसे नाम शामिल हैं. वहीं पाकिस्तान की ओर से 56 लोगों ने समर्थन दिया है, जिनमें पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी भी शामिल हैं.

हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती शत्रुता का माहौल आम नागरिकों के हितों के अनुकूल नहीं है. उनका मानना है कि संवाद बहाली से क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी और विकास के नए अवसर खुल सकते हैं.

भाजपा नेता रविंदर रैना ने जताई आपत्ति

इस पत्र को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. जम्मू-कश्मीर भाजपा के नेता रविंदर रैना ने भारत-पाकिस्तान वार्ता की मांग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि भारत सरकार को किसी पत्र के आधार पर अपने फैसले लेने की आवश्यकता नहीं है.

रैना ने कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों का पक्षधर रहा है, लेकिन आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते. उनके अनुसार, जब तक सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लगती, तब तक किसी भी वार्ता प्रक्रिया को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है.

पुराने अनुभवों का भी किया उल्लेख

रविंदर रैना ने अपने बयान में भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्व में हुई कूटनीतिक पहलों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर बस यात्रा के माध्यम से संबंध सुधारने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बाद कारगिल संघर्ष और अन्य घटनाएं सामने आईं. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संबंधों में सुधार के प्रयास किए थे.

रैना ने सवाल उठाया कि जो लोग संवाद की वकालत कर रहे हैं, क्या वे भविष्य में किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि या सीमा पार से होने वाले दुस्साहस को रोकने की गारंटी दे सकते हैं. उनका कहना है कि भारत की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी वार्ता को इसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए.