सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तीन भाषाएं अनिवार्य करने वाली सीबीएसई की नीति के खिलाफ याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है. सर्वोच्च अदाल ने मामले में केंद्र सरकार के साथ ही सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया है. नोटिस में कोर्ट ने दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं. बता दें कि सीबीएसई की नई नीति के मुताबिक चालू शैक्षणिक सत्र में 1 जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है. इन दो भारत की मूल भाषाएं होनी अनिवार्य हैं.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपल एम. पंचोली कर खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि भाषा व्यक्तिगत पसंद का विषय है, इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता. कुल मिलाकर यह संघ वाद और पसंद के संवैधानिक अधिकार का मामला है. कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इंकार दिया है और साथ मामले की सुनवाई जुलाई में करने की बात कही है.
याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एश्वर्या भाटी से कहा कि सीबीएसई के इस निर्णय को लागू करने के लिए क्या तैयारियां कर चुकी है, इस पर एक रिपोर्ट पेश करें. एक अन्य याचिका कर्ता यशिका भंडारी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में सीबीएसई की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है छात्रों को अगले शैक्षणिक सत्र से तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी.
बता दें कि सीबीएसई की यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का एक हिस्सा है. बोर्ड ने कहा है कि साहित्यिक सामग्री के चयन के संबंध में 15 जून को दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे.