Cabinet raises wheat MSP: देश में रबी फसलों की बुवाई से पहले केंद्र सरकार ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है. बुधवार, 1 अक्टूबर 2025 को कैबिनेट ने 2026-27 विपणन वर्ष के लिए छह रबी फसलों का MSP तय किया है. इनमें सबसे अहम गेहूं का समर्थन मूल्य है, जिसे बढ़ाकर ₹2,585 प्रति क्विंटल कर दिया गया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सरकार ने रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य रखा है और किसानों की लागत में भी इजाफा हुआ है.
पिछले साल 2025-26 विपणन वर्ष के लिए गेहूं का MSP ₹2,425 प्रति क्विंटल था. इस बार ₹160 प्रति क्विंटल की वृद्धि कर इसे ₹2,585 कर दिया गया है. यानी किसानों को हर क्विंटल पर सीधा अतिरिक्त लाभ मिलेगा. गेहूं भारत की सबसे बड़ी रबी फसल है, जिसकी बुवाई अक्टूबर के अंत से शुरू होकर मार्च तक चलती है और कटाई अप्रैल-जून के बीच होती है.
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि MSP का यह फैसला कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों पर आधारित है. CACP हर साल उत्पादन लागत, मांग-आपूर्ति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति जैसे पहलुओं को देखकर MSP तय करता है. MSP बढ़ने से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
सरकार ने 2025-26 के लिए गेहूं का उत्पादन लक्ष्य 119 मिलियन टन तय किया है. पिछले साल यानी 2024-25 में वास्तविक उत्पादन 117.5 मिलियन टन रहा था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. MSP में बढ़ोतरी के साथ सरकार को उम्मीद है कि किसान अधिक उत्साह से बुवाई करेंगे और उत्पादन लक्ष्य हासिल करना आसान होगा.
गेहूं के अलावा जौ, चना, मसूर, सरसों और ज्वार जैसी रबी फसलों का MSP भी कैबिनेट ने तय किया है. हालांकि सबसे बड़ा असर गेहूं पर दिखेगा क्योंकि यह भारत की खाद्य सुरक्षा से सीधे जुड़ा है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए सबसे अहम अनाज है. MSP बढ़ने से न केवल किसानों को फायदा होगा, बल्कि मंडियों में भी गेहूं की खरीदी सुचारु तरीके से हो पाएगी.
सरकार के इस फैसले से किसानों की आय में सीधा लाभ होगा और वे उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे. वहीं, उपभोक्ता बाजार में गेहूं और आटे की कीमतों पर भी इसका असर दिख सकता है. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बढ़े हुए MSP से उत्पादन लक्ष्य कितना हासिल होता है और किसानों के जीवन स्तर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है.