Trump Tariff Row: भारत और अमेरिका के रिश्ते बीते कुछ समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं. टैरिफ वॉर और रूस-यूक्रेन युद्ध पर रुख को लेकर दोनों देशों में मतभेद गहराए, लेकिन कूटनीतिक संवाद के जरिए रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश जारी है. अब अक्टूबर के अंत में मलेशिया में होने वाले आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर हलचल तेज हो गई है.
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 50% टैरिफ लगाने का बड़ा फैसला लिया था. इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया. इसके साथ ही अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ नजदीकी बढ़ाकर नई दिल्ली की चिंताएं और गहरी कर दीं. ऊर्जा क्षेत्र में रूस से भारत की तेल खरीद पर भी वॉशिंगटन ने नाराजगी जताई है. ट्रंप ने खुले तौर पर चेताया कि रूस से कच्चा तेल खरीदना वैश्विक प्रयासों को कमजोर करता है, जिनका मकसद यूक्रेन युद्ध खत्म करना है.
ट्रंप प्रशासन के करीबी सहयोगियों ने भी भारत पर तीखे हमले किए हैं. व्हाइट हाउस सलाहकार पीटर नवारो ने तो यहां तक कह दिया कि रूस-यूक्रेन युद्ध 'मोदी का युद्ध' है और भारत अपनी रिफाइनरियों के जरिए 'रशियन ऑयल लॉन्ड्रोमैट' बन गया है. इन बयानों ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया.
हालांकि इस सख्त रुख के बीच कुछ नरमी भी देखने को मिली है. दोनों देशों ने माना है कि व्यापार वार्ता जारी है और ट्रंप ने हाल ही में पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके साथ निजी रिश्तों की मजबूती पर जोर दिया. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि उनके पीएम मोदी के साथ 'बेहतरीन रिश्ते' हैं और भारत-अमेरिका की साझेदारी उनके लिए 'बहुत खास' है. पीएम मोदी ने भी इस रिश्ते को 'सकारात्मक और भविष्यमुखी' बताया.
भारत-अमेरिका संवाद सिर्फ द्विपक्षीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डाल रहा है. हाल ही में पीएम मोदी ने ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना का समर्थन किया. इसमें युद्धविराम, कैदियों की अदला-बदली और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में संक्रमणकालीन सरकार का प्रस्ताव शामिल था. मोदी ने इसे 'टिकाऊ शांति और विकास का रास्ता' बताया. ट्रंप ने भी मोदी की पोस्ट को शेयर कर कूटनीतिक तालमेल का संकेत दिया.
मलेशिया में होने वाले आसियान शिखर सम्मेलन पर अब सबकी निगाहें टिक गई हैं. अगर ट्रंप इसमें शामिल होते हैं और पीएम मोदी से आमने-सामने बैठते हैं, तो यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों में नया मोड़ साबित हो सकती है. यह मुलाकात न सिर्फ व्यापार विवाद को सुलझाने का मंच बनेगी, बल्कि रूस-यूक्रेन और गाजा संकट जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी भारत और अमेरिका की भूमिका तय करने में अहम साबित हो सकती है.