नई दिल्ली: भारत इस बार 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. दो दिवसीय यह बैठक 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगी. विदेश मंत्रालय ने सम्मेलन का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है. पहले दिन BRICS के सदस्य देशों के नेता बंद कमरे में बैठक करेंगे. इसके अलावा Bharat Innovates प्रदर्शनी, सामूहिक पौधारोपण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित रात्रिभोज होगा. दूसरे दिन साझेदार और आमंत्रित देशों के नेता सम्मेलन में शामिल होंगे.
12 सितंबर को दोपहर दो बजे BRICS सदस्य देशों के नेताओं का भारत मंडपम पहुंचने का कार्यक्रम है. इसके बाद आधिकारिक फोटो सत्र होगा. दोपहर 2:35 बजे सदस्य देशों की बंद बैठक होगी. इसमें समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा होगी. शाम को नेता Bharat Innovates प्रदर्शनी का दौरा करेंगे. इसके बाद सामूहिक फोटो और पौधारोपण कार्यक्रम होगा.
पहले दिन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित रात्रिभोज के साथ आगे बढ़ेगा. यह रात्रिभोज शाम 7:30 बजे भारत मंडपम के तीसरे स्तर पर होगा. सम्मेलन से जुड़े कई कार्यक्रमों की लाइव फीड BRICS और विदेश मंत्रालय के YouTube चैनलों के अलावा दूरदर्शन पर उपलब्ध कराई जाएगी. कार्यक्रमों की तस्वीरों के लिए BRICS Flick का भी इस्तेमाल किया जाएगा.
13 सितंबर को BRICS के साझेदार देशों और आमंत्रित देशों के नेताओं का आगमन होगा. सुबह 9:55 बजे उनका भारत मंडपम पहुंचने का कार्यक्रम है. इसके बाद सामूहिक फोटो होगी. सुबह 10:50 बजे मुख्य खुला सत्र शुरू होगा. इसका विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के जरिए समावेशी वैश्विक विकास का भविष्य तय करना है.
BRICS ग्लोबल साउथ के देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग का मंच है. वर्तमान में इसके 11 पूर्ण सदस्य हैं. इनमें भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. इंडोनेशिया जनवरी 2025 में पूर्ण सदस्य बना. इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम साझेदार देशों की श्रेणी में हैं.
भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली. इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में समूह की अध्यक्षता कर चुका है. इस साल BRICS की स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं. भारत की अध्यक्षता का मुख्य जोर लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास पर है. सम्मेलन को पूरे साल भारत में हुई बैठकों और कार्यक्रमों के बाद सबसे अहम आयोजन माना जा रहा है.