कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के नवरात्रि के दौरान मांसाहार न करने से जुड़े बयान के बाद देश में भोजन की प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है. भारत को अक्सर एक शाकाहारी-बहुल देश समझा जाता है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखाते हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) और सरकारी विभागों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि देश की बहुसंख्यक हिंदू आबादी का एक बड़ा हिस्सा नियमित या कभी-कभार मांसाहार का सेवन करता है.
NFHS-5 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 78% हिंदू आबादी (करीब 65 करोड़ लोग) किसी न किसी रूप में नॉनवेज खाती है. अन्य समुदायों की बात करें तो देश में लगभग 98% मुस्लिम और 98% ईसाई मांसाहारी हैं, जबकि जैन समुदाय में यह आंकड़ा करीब 15% है. ये आंकड़े साबित करते हैं कि भारत में भोजन का चयन केवल धार्मिक मान्यताओं से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति और भूगोल से तय होता है.
दक्षिण और पूर्वी भारत में मांसाहार का प्रचलन सबसे अधिक है, जबकि उत्तर और पश्चिमी भारत में शाकाहार का प्रभाव अधिक दिखता है:
पूर्वी और दक्षिण भारत: तेलंगाना (99%), पश्चिम बंगाल (98%), ओडिशा (98%), केरल (97%), तमिलनाडु (97%) और आंध्र प्रदेश (96%) में अधिकांश आबादी नॉनवेज खाती है. पूर्वोत्तर राज्यों में भी यह आंकड़ा 95% से 98% के बीच है.
उत्तर और पश्चिम भारत: राजस्थान में सबसे कम (लगभग 25%) लोग नॉनवेज खाते हैं. इसके अलावा हरियाणा (30%), पंजाब (35%), गुजरात (40%) और उत्तर प्रदेश (55%-65%) में शाकाहार का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक है.
पशुपालन विभाग के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत में प्रति व्यक्ति वार्षिक मीट उपलब्धता 7.51 किलोग्राम (लगभग 20.6 ग्राम प्रतिदिन) रही. भारत वैश्विक स्तर पर मांस उत्पादन में चौथे स्थान पर है. देश का कुल मीट उत्पादन 2014-15 के 6.69 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 10.50 मिलियन टन पहुंच गया है. कुल उत्पादन में पश्चिम बंगाल (12.46%) और उत्तर प्रदेश (12.20%) सबसे आगे हैं.
पिछले 20 वर्षों में देश में मांसाहार करने वालों का प्रतिशत बढ़ा है. आंकड़ों के मुताबिक, 2006 में जहां 80% पुरुष मांसाहारी थे, वहीं 2021 तक यह आंकड़ा बढ़कर 87% हो गया. महिलाओं में भी यह अनुपात 2006 के 71% से बढ़कर 2021 में 75% तक पहुंच गया है, जो बदलती जीवनशैली को दर्शाता है.