नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आर के सिंह को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई शनिवार 15 नवंबर को की गई. आर के सिंह पहले ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं और वे मोदी सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं.
हाल के दिनों में वे पार्टी के कई नेताओं और चुनाव प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे थे. उन्होंने एनडीए के कुछ नेताओं पर भ्रष्टाचार और गुटबाजी के आरोप लगाए थे. इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर भी गंभीर टिप्पणी की थी और बिहार चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी.
Bihar BJP suspends former Union Minister RK Singh for "anti-party activities". The party has asked him to submit a reply within one week. pic.twitter.com/fFB7ydsvnf
— ANI (@ANI) November 15, 2025
आर के सिंह ने मोकमा में एक जन सुराज समर्थक की हत्या के बाद चुनाव आयोग को जिम्मेदार बताया था. उनका कहना था कि यह घटना प्रशासन और चुनाव आयोग की नाकामी को दिखाती है. घटना के बाद दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था. सिंह ने जनता से अपील की थी कि वे किसी भी पार्टी के अपराधी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को वोट न दें.
उन्होंने एनडीए के कुछ नेताओं जैसे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बाहुबली नेता आनंद सिंह पर भी निशाना साधा था. उनकी यह खुली आलोचना लगातार पार्टी नेतृत्व की नाराजगी का कारण बनती गई और आखिरकार उन्हें निलंबित कर दिया गया.
Bihar BJP suspends party MLC Ashok Kumar Agarwal and Katihar Mayor Usha Agarwal for "anti-party activities". The party has asked them to submit a reply within one week. pic.twitter.com/gcTBbvchZi
— ANI (@ANI) November 15, 2025
इसी के साथ बिहार भाजपा ने एमएलसी अशोक कुमार अगरवाल और कटिहार की मेयर उषा अगरवाल को भी निलंबित कर दिया है. अशोक अगरवाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे सौरव अगरवाल को वीआईपी के टिकट पर कटिहार से चुनाव मैदान में उतारा था. यह कदम पार्टी की रणनीति के खिलाफ माना गया.
भाजपा ने दोनों नेताओं से एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है. यह साफ है कि भाजपा चुनाव के बाद पार्टी अनुशासन पर और कड़ा रुख अपना रही है. पार्टी के भीतर नेतृत्व और निर्णयों को लेकर चल रही नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है. आर के सिंह का निलंबन यह संकेत देता है कि भाजपा किसी भी तरह की असहमति को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है.