भारत लंबे समय तक दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता रहा है लेकिन अब जनसंख्या से जुड़े आंकड़े एक नया संकेत दे रहे हैं. हाल ही में अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने भारत की घटती प्रजनन दर पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि देश में बच्चों के जन्म की औसत संख्या लगातार कम हो रही है और यह उस स्तर से नीचे पहुंच चुकी है जो किसी आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है. यही कारण है कि जनसंख्या विशेषज्ञ भी इस बदलाव को गंभीरता से देख रहे हैं.
कुल प्रजनन दर, जिसे टीएफआर (TFR) कहा जाता है, यह बताती है कि एक महिला अपने पूरे जीवनकाल में औसतन कितने बच्चों को जन्म देती है. किसी देश की जनसंख्या के भविष्य को समझने में यह सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक माना जाता है. यदि यह दर अधिक होती है तो आबादी तेजी से बढ़ती है, जबकि इसके कम होने पर जनसंख्या वृद्धि धीमी पड़ जाती है. भारत में पिछले कई दशकों से यह दर लगातार घट रही है. बदलती जीवनशैली, शिक्षा का बढ़ता स्तर, शहरीकरण और परिवार नियोजन के प्रति बढ़ती जागरूकता को इसके प्रमुख कारणों में गिना जाता है. यही वजह है कि आज जनसंख्या वृद्धि पहले की तुलना में काफी धीमी हो चुकी है.
जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार 2.1 बच्चों प्रति महिला की दर को रिप्लेसमेंट स्तर माना जाता है. इसका अर्थ है कि एक पीढ़ी अगली पीढ़ी के रूप में खुद को संख्या के हिसाब से बनाए रख सकती है लेकिन भारत की टीएफआर अब 1.9 तक पहुंच गई है. इसका सीधा मतलब है कि लंबे समय तक यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में आबादी का आकार घटने लग सकता है. एलन मस्क की चिंता भी इसी मुद्दे को लेकर है. उनका मानना है कि कम जन्म दर केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जब प्रजनन दर लंबे समय तक कम रहती है तो समाज की आयु संरचना बदलने लगती है. युवा आबादी का हिस्सा घटता है और बुजुर्ग लोगों की संख्या बढ़ने लगती है. इसका असर श्रम बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर पड़ता है. कामकाजी लोगों की संख्या कम होने से आर्थिक विकास की गति भी प्रभावित हो सकती है. यही कारण है कि कई देश अब जन्म दर बढ़ाने के लिए नई नीतियां बना रहे हैं और परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन भी दे रहे हैं.
भारत के कुछ राज्यों में अभी भी प्रजनन दर 2.1 से अधिक है जिनमें राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं, लेकिन अधिकांश राज्यों में यह स्तर नीचे आ चुका है. देश में सबसे कम TFR दिल्ली में 1.2 है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार भारत की आबादी 2062 तक अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचेगी और उसके बाद धीरे-धीरे घटने लगेगी. यही स्थिति चीन, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, हांगकांग और ताइवान जैसे देशों में भी देखी जा रही है. इन देशों की सरकारें बच्चों के जन्म को बढ़ावा देने के लिए नकद सहायता, टैक्स छूट और अन्य सुविधाएं दे रही हैं. भारत में भी अब इस विषय पर चर्चा तेज हो रही है क्योंकि जनसंख्या का संतुलन भविष्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता से सीधे जुड़ा हुआ है.