नई दिल्ली: रविवार को आए भूकंप के झटकों ने भारत सहित कई पड़ोसी देशों में लोगों को चौंका दिया. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.3 दर्ज की गई. भारत के अलावा नेपाल, चीन और भूटान में भी धरती कांपने की खबरें सामने आईं. भारत में असम के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने कंपन महसूस किया.
वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की सतह कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जो लगातार गतिशील रहती हैं. जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे पर दबाव बनाती हैं, तो उस क्षेत्र को फॉल्ट लाइन कहा जाता है. लंबे समय तक दबाव बढ़ने के बाद प्लेटों में अचानक हलचल होती है, जिससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है और भूकंप उत्पन्न होता है.
भूकंप की तीव्रता का आकलन रिक्टर स्केल के जरिए किया जाता है. इस पैमाने पर दर्ज संख्या जितनी अधिक होती है, भूकंप का प्रभाव उतना ही ज्यादा माना जाता है. सामान्य तौर पर 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप इतने हल्के होते हैं कि अधिकांश लोगों को उनका एहसास भी नहीं होता. वहीं, 4.5 या उससे अधिक तीव्रता के झटके भवनों, मकानों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं. इसी वजह से ऐसे भूकंपों को गंभीरता से लिया जाता है.