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अजित पवार के आखिरी सात मिनट में क्या हुआ था? वो तीन एंगल जिसमें बंद है प्लेन क्रैश की पूरी मिस्ट्री

बारामती में हुए विमान हादसे ने महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर दिया है. डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत के बाद अब जांच उनके आखिरी सात मिनटों पर टिक गई है. विमान पूरी तरह फिट था, पायलट अनुभवी थे, फिर भी हादसा हुआ.

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Edited By: Reepu Kumari
अजित पवार के आखिरी सात मिनट में क्या हुआ था? वो तीन एंगल जिसमें बंद है प्लेन क्रैश की पूरी मिस्ट्री
Courtesy: x-@Kedar_speaks88

बारामती एयरपोर्ट के पास हुए विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत हो गई. शुरुआती जांच में विमान और पायलट दोनों को सुरक्षित और सक्षम बताया गया है. कोई MAYDAY कॉल भी नहीं गया. इसके बावजूद प्लेन क्रैश हुआ. अब जांच एजेंसियां उन आखिरी सात मिनटों की जांच कर रही हैं, जिनमें विमान ने लैंडिंग की दो कोशिशें की थीं.

महाराष्ट्र की राजनीति में वक्त की सख्ती के लिए पहचाने जाने वाले अजित पवार की जीवन घड़ी बुधवार सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर थम गई. बारामती के पास हुए भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया. हादसे में अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई.

आग की लपटें

हादसे के बाद जब मलबे से आग की लपटें उठ रही थीं, तब पहचान करना भी मुश्किल हो गया था. अजित पवार की अंतिम पहचान उनके हाथ में बंधी घड़ी से हुई. वही घड़ी जो उनका निजी शौक भी थी और उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी. अब यही हादसा कई सवाल खड़े कर रहा है.

कैसे बीते आखिरी सात मिनट?

28 जनवरी की सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर ‘लियरजेट 45’ ने मुंबई से बारामती के लिए उड़ान भरी. उड़ान सामान्य थी और मौसम को लेकर कोई चेतावनी नहीं थी. करीब 8:37 बजे विमान पहली बार रडार से गायब हुआ. दो मिनट बाद वह फिर दिखा. इसी दौरान विमान ने पहली बार लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन दृश्यता कम होने के कारण गो-अराउंड करना पड़ा.

निर्णायक पल कैसे आया

8 बजकर 42 मिनट पर पायलटों ने एटीसी को बताया कि रनवे साफ नहीं दिख रहा. 8:43:11 पर दूसरी बार रनवे की ओर अप्रोच की गई और पायलटों ने रनवे दिखने की पुष्टि की. एटीसी ने लैंडिंग की अनुमति दी. लेकिन 8:44 बजे विमान रनवे के पास पहुंचकर अचानक नीचे गोता लगाते हुए खाई में गिर गया और आग का गोला बन गया.

मौसम और रनवे पर सवाल

सरकारी बयान के मुताबिक उस समय दृश्यता करीब 3,000 मीटर थी. लेकिन पायलटों और प्रत्यक्षदर्शियों की बात इससे अलग दिखती है. बारामती का रनवे टेबल-टॉप है, जहां ऊंचाई का भ्रम हो सकता है. यहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम भी नहीं है, जिससे लैंडिंग पूरी तरह आंखों पर निर्भर रहती है.

तकनीकी और मानवीय पहलू

जांच में बताया गया है कि विमान पूरी तरह एयरवर्थी था. पायलट के पास 15,000 घंटे और को-पायलट के पास 1,500 घंटे का अनुभव था. फिर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या आखिरी पल में ऊंचाई या रफ्तार का गलत अंदाजा हुआ. या फिर जल्दबाजी में दूसरी लैंडिंग की कोशिश भारी पड़ गई.

सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश

हादसे के बाद राजनीति भी तेज हो गई है. ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और सचिन अहीर ने जांच पर सवाल उठाए हैं. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे राजनीति बताया है. AAIB और DGCA अब मलबे, फ्लाइट डेटा, एटीसी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के जरिए सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.