नई दिल्ली: भारत की राजनीति में धन का महत्व एक बार फिर सामने आया है. ADR की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत बढ़ गया.
इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा हिस्सा सत्तारूढ़ बीजेपी का रहा, जिसने अन्य सभी दलों के संयुक्त चंदे से भी कई गुना अधिक राशि जुटाई. रिपोर्ट में कॉर्पोरेट दानदाताओं की भूमिका भी प्रमुख रूप से सामने आई है.
ADR की ताजा रिपोर्ट में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय पार्टियों को मिलने वाले दान में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 20 हजार रुपये से अधिक के चंदे में कुल 161 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो देश की राजनीतिक फंडिंग के स्वरूप में बड़ा बदलाव दर्शाती है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में राष्ट्रीय दलों को कुल 6,648.563 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो 11,343 दानदाताओं से प्राप्त हुआ. इनमें सबसे ज्यादा हिस्सा बीजेपी को मिला, जिसे 6,074.015 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ. यह राशि बाकी सभी राष्ट्रीय दलों के कुल चंदे से कई गुना अधिक है.
वहीं, कांग्रेस को 517.394 करोड़ रुपये का दान मिला, जो भाजपा के मुकाबले काफी कम है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी को 27.044 करोड़ रुपये और नेशनल पीपल्स पार्टी को 1.943 करोड़ रुपये का चंदा मिला. बहुजन समाज पार्टी ने एक बार फिर दावा किया कि उसे 20 हजार रुपये से अधिक का कोई दान नहीं मिला.
चंदे में बढ़ोतरी की बात करें तो 2024-25 में कुल 4,104.285 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई. भाजपा का चंदा 171 प्रतिशत बढ़कर 2,243.947 करोड़ से 6,074.015 करोड़ रुपये हो गया. कांग्रेस का चंदा 84 प्रतिशत बढ़कर 281.48 करोड़ से 517.394 करोड़ रुपये पहुंच गया. आम आदमी पार्टी के चंदे में 244 प्रतिशत और एनपीईपी के चंदे में 1,313 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुल चंदे का सबसे बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेट सेक्टर से आया. लगभग 92.18 प्रतिशत यानी 6,128.787 करोड़ रुपए कंपनियों द्वारा दिए गए, जबकि व्यक्तिगत दानदाताओं का योगदान 505.66 करोड़ रुपये रहा. भाजपा को अकेले कॉर्पोरेट सेक्टर से 5,717.167 करोड़ रुपये मिले, जो अन्य सभी दलों के संयुक्त कॉर्पोरेट चंदे से कई गुना अधिक है.
कुछ बड़े दानदाताओं में Serum Institute of India ने 100 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जबकि Rungta Sons Private Limited ने भाजपा को 95 करोड़ रुपये का दान दिया. नियमों के तहत सभी राष्ट्रीय दलों को 20 हजार रुपये से अधिक के चंदे का विवरण चुनाव आयोग को निर्धारित समय सीमा के भीतर देना होता है.