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मनीष सिसोदिया की सीट AAP ने यूं ही नहीं बदली, क्या अवध ओझा को बनाया गया 'बलि का बकरा'!

Manish Sisodia: आम आदमी पार्टी ने आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट जारी की. इस लिस्ट में हाल ही में पार्टी में शामिल हुए अवध ओझा को भी जगह दी गई है.

Gyanendra Tiwari
मनीष सिसोदिया की सीट AAP ने यूं ही नहीं बदली, क्या अवध ओझा को बनाया गया 'बलि का बकरा'!
Courtesy: Social Media

Manish Sisodia: दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने 9 दिसंबर को दूसरी लिस्ट जारी की. इस लिस्ट में 20 प्रत्याशियों को जगह दी गई है. इस लिस्ट में चौंकाने वाला नाम है. और वो नाम दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को उनकी परंपरागत सीट से टिकट नहीं दिया गया. पटपड़गंज सीट से जनता का प्रतिनधित्व करने वाले सिसोदियों की जगह हाल ही में पार्टी में शामिल हुए अवध ओझा को टिकट दिया गया है. वहीं, सिसोदियों की सीट बदलकर उन्हें जंगपुरा सीट से चुनावी मैदान में उतारा गया है. अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि आखिर क्या आम आदमी पार्टी को ये डर सता रहा था कि अगर सिसोदिया को उनकी परंपरागत सीट से उतारा तो वो चुनाव हार सकते हैं? या फिर उनकी सीट बदलने का कोई और कारण था. आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं. 

आम आदमी दिल्ली में सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है. यानी एंटी इनकंबेंसी.  आप के वरिष्ट नेताओं की गिरफ्तारी और उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते आम आदमी पार्टी विपक्ष के निशाने पर है. शायद इसी कारण आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी रणनीति बदल दी है. 

एंटी इनकंबेसी के चलते 'आप' ने बदली सिसोदिया की सीट 

एंटी इनकंबेंसी की वजह से आम आदमी पार्टी अपने मौजूदा विधायकों को अलग-अलग क्षेत्रों से चुनावी मैदान में उतार रही है. कुछ विधायकों का पत्ता भी काटा जा रहा है. 

आम आदमी पार्टी ने इस कवायद को शुरू भी कर दिया है. जिसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री और पटपड़गंज के विधायक मनीष सिसोदिया को अगले साल की शुरुआत में होने वाले चुनाव के लिए जंगपुरा से टिकट दिया गया है.

जहां से जीता तीन बार चुनाव उस सीट का क्यों करना पड़ा त्याग?

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 2013, 2015 और 2020 से पटपड़गंज सीट से चुनाव जीता था. लेकिन अब 2025 में होने वाले चुनाव में वह जंगपुरा से उतारा गया है. 2020 में उन्हें मात्र 3100 वोटों के अंतर से जीत मिली थी. जीत के अंतर को देखते हुए कहीं न कहीं एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अवध ओझा को जानबूझकर मनीष सिसोदिया की सीट से उतारा गया है. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अवध ओझा को बलि का बकरा बनाया गया है. 

आप के सूत्रों ने बताया, "2020 में पूर्वी और उत्तर पूर्वी दिल्ली समेत कुछ सीटों पर BJP ने CAA विरोधी कैंपेन चलाया था. कम से कम दो वरिष्ठ बीजेपी नेताओं ने 10 दिनों तक लगाताार पटपड़गंज में जनता के बीच मौजूदगी बनाए रखी थी.  हालांकि, इस साल अब तक ऐसा कोई कारण नहीं है जिसका भाजपा लाभ उठा पाई हो."

ऐसे में एक कारण यह भी हो सकता है कि शायद पटपड़गंज सीट पर बीजेपी ने खुद को और मजबूत कर लिया है. शायद इसी वजह से मनीष सिसोदिया की सीट बदली गई है. 

इससे पहले 21 नवंबर को आम आदमी पार्टी ने 11 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी की थी. इस लिस्ट में बीजेपी से आप में शामिल हुए  नेताओं को भी टिकट दिया गया था. आम आदमी पार्टी ने कहा कि सर्वे के नतीजों के कारण सीटों को बदलना पड़ रहा है. 

इन सबके बीच पिछले दो दिनों में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और तिमारपुर विधायक दिलीप पांडे, जो इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के समय से पार्टी से जुड़े हैं, ने घोषणा की है कि वे इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे. गुलाब सिंह, जो पार्टी के गुजरात चुनाव अभियान प्रभारी थे, भी चुनाव नहीं लड़ेंगे.

2020 में आम आदमी पार्टी ने 20 नए चेहरों को चुनावी मैदानों में उतारा था. उसी फॉर्मूले को अपनाते हुए शायद इस बार भी अरविंद केजरीवाल चुनावी लिस्ट में नए चेहरों को मौका दे रहे हैं.  आप के एक नेता ने कहा, इस बार का चुनाव बहुत अलग है. हम फिर से जीतने जा रहे हैं. और इस जीत में हमारे विधायकों की पॉपुलैरिटी मेन फैक्टर होने वाली है."