BRICS Summit 2026: 'ब्रिक्स नॉन वेस्ट बने, एंटी वेस्ट नहीं', शशि थरूर का बड़ा बयान
वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि ब्रिक्स को 'गैर-पश्चिमी' मंच होना चाहिए, न कि 'पश्चिम-विरोधी'. उन्होंने भारत-चीन संबंधों, व्यापार घाटे और ग्लोबल साउथ पर विचार साझा किए.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि भारत को ब्रिक्स को एक ऐसा मंच बनाए रखने पर जोर देना चाहिए जो "गैर-पश्चिमी हो, लेकिन पश्चिम-विरोधी नहीं". उन्होंने तर्क दिया कि ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी मंच के रूप में पेश करना भारत के राष्ट्रीय हित में नहीं होगा. थरूर के अनुसार, समूह के कुछ सदस्य इसे भू-राजनीतिक पश्चिम-विरोधी रूप देने के इच्छुक हैं, लेकिन मेजबान देश के रूप में भारत को ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाने के साथ-साथ अपने प्रत्यक्ष राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना चाहिए.
सम्मेलन की मेजबानी और द्विपक्षीय बैठकों का महत्व
थरूर ने भारत द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी को "बड़ी प्रतिष्ठा" का विषय बताया, जिसमें सदस्य और पर्यवेक्षक देशों के लगभग एक दर्जन राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन द्विपक्षीय बातचीत के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित मुलाकातें वैश्विक स्तर पर विशेष ध्यान आकर्षित करेंगी.
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भारत-चीन संबंधों में सीमा और व्यापार संबंधी चुनौतियां
भारत-चीन संबंधों पर बोलते हुए थरूर ने कहा कि 2020 की गलवान घटना के बाद से रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं और इसकी मुख्य वजह चीनी पक्ष की ओर से उठाए गए कदम हैं. उन्होंने चीन पर अनिश्चित सीमा के पास जमीनी स्थिति बदलने की कोशिश करने, वीजा संबंधी समस्याएं खड़ी करने और भारतीय आयातकों की निर्भरता का फायदा उठाकर व्यापार को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक स्वाभिमानी भारत ऐसे दबावों के आगे नहीं झुकेगा.
ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व और कूटनीतिक परीक्षा
थरूर ने ब्रिक्स को 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच करार दिया. इसके 11 सदस्य देश दुनिया की अधिकांश आबादी और 41 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर आम सहमति बनाना एक चुनौती रहा है. पूर्व में सर्वसम्मत घोषणापत्र के बजाय 'अध्यक्षीय घोषणापत्र' जारी करना पड़ा था, और इस बार भी आम सहमति बनाना भारतीय कूटनीति की बड़ी परीक्षा होगी.
व्यापारिक असंतुलन और अमेरिकी प्रतिबंधों की चिंता
व्यापारिक संतुलन पर चिंता जताते हुए थरूर ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, लेकिन यह अक्सर भारत के नुकसान में रहा है. इसके अलावा, रूस के साथ व्यापार जारी रखने पर अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका से भारतीय सामानों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है. ऐसे में, उन्होंने सुझाव दिया कि यदि अमेरिका के साथ संबंध अनिश्चित होते हैं, तो भारत को ब्रिक्स का उपयोग अपने निर्यात बाजारों और संचार माध्यमों को विविध बनाने के लिए करना चाहिए.