भारत के 100 GW परमाणु मिशन में रूस की बड़ी एंट्री, Rosatom ने ऑफर किए नए रिएक्टर
रूस की सरकारी परमाणु कंपनी Rosatom ने भारत के 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता लक्ष्य में सहयोग की पेशकश की है. कंपनी बड़े रिएक्टरों के साथ छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भी उपलब्ध कराएगी.
भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार अभियान के बीच रूस की Rosatom ने अपने आधुनिक परमाणु तकनीकी समाधान पेश किए हैं. कंपनी ने बड़े बिजली उत्पादन वाले रिएक्टरों से लेकर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर तक की पेशकश की है. यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत 2047 तक अपनी परमाणु क्षमता को 100 GW तक पहुंचाना चाहता है.
100 GW लक्ष्य में रूस का बड़ा प्रस्ताव
Rosatom ने दिल्ली में आयोजित Innoprom.India औद्योगिक प्रदर्शनी के दौरान भारत के सामने अपने परमाणु समाधान रखे. कंपनी के मुताबिक भारत के बड़े लक्ष्य को देखते हुए वह अलग-अलग क्षमता और जरूरत के हिसाब से तकनीक उपलब्ध कराने के लिए तैयार है. इसमें बड़े पावर यूनिट्स के साथ छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भी शामिल हैं. Rosatom भारत में परमाणु बिजली संयंत्र बनाने वाली फिलहाल एकमात्र विदेशी कंपनी है.
कुडनकुलम से आगे बढ़ रही साझेदारी
भारत और रूस की परमाणु साझेदारी का सबसे बड़ा उदाहरण तमिलनाडु का कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र है. यहां VVER-1000 रिएक्टर तकनीक के दो यूनिट काम कर रहे हैं, जबकि चार और यूनिट अलग-अलग चरणों में हैं. Rosatom ने VVER-1200 रिएक्टर भी पेश किया है, जिसे VVER-1000 की तुलना में ज्यादा आधुनिक बताया गया है. कंपनी का कहना है कि वह भारत के परमाणु विस्तार लक्ष्य में पहले से व्यावहारिक योगदान दे रही है.
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परमाणु ऊर्जा के साथ कई दूसरे क्षेत्रों पर जोर
Rosatom का सहयोग केवल परमाणु बिजली तक सीमित नहीं है. कंपनी ने परमाणु चिकित्सा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, कंपोजिट सामग्री, डिजिटल तकनीक और लॉजिस्टिक्स में भी साझेदारी की संभावनाएं बताई हैं. भारत-रूस बिजनेस डायलॉग में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने रूसी कंपनियों से भारत में उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया. उन्होंने Make in India के तहत भारतीय उद्योग, कुशल श्रम और निर्माण क्षमता का लाभ उठाने पर जोर दिया.
नई औद्योगिक साझेदारियों को भी मिली गति
प्रदर्शनी के दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच कई समझौते भी हुए. इनमें बिजली संयंत्रों के डिजिटलीकरण और ऊर्जा परिसंपत्तियों के रखरखाव से जुड़ा समझौता शामिल है. टाइटेनियम स्पंज के पायलट प्लांट के लिए भी एक करार हुआ. इसके अलावा दुर्लभ खनिजों, रेयर अर्थ मैग्नेट और टाइटेनियम, जिरकोनियम, हैफ्नियम व कैल्शियम जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई. Rosatom ने कहा कि तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन के जरिए भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जा सकता है.