नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार की सुगमता के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों को अनिवार्य बताया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की मौजूदगी में पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यापार तभी प्रगति कर सकता है जब समुद्री लेन खुली रहें, सी रूट सुरक्षित हों और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
पीएम मोदी ने बताया कि 2006 में महज 4 देशों से शुरू हुआ यह समूह आज सहयोगियों को मिलाकर 21 देशों का परिवार बन चुका है. ब्रिक्स देश दुनिया की 50% आबादी, 25% वैश्विक व्यापार और 40% जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं. वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं और दुनिया के 50% रियल-टाइम डिजिटल भुगतान अकेले भारत की यूपीआई (UPI) तकनीक के जरिए हो रहे हैं.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी फोरम को संबोधित करते हुए पश्चिमी प्रतिबंधों पर निशाना साधा. उन्होंने जी-7 की तुलना में ब्रिक्स की मजबूत स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि जी-7 का वैश्विक जीडीपी में योगदान केवल 18% है, जबकि ब्रिक्स 40% की हिस्सेदारी रखता है. पुतिन ने कहा कि तमाम प्रतिबंधों के बावजूद ब्रिक्स और रूस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. बैठक से पूर्व पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया.
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स देशों की आर्थिक सहभागिता को धरातल पर उतारने के लिए तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे:
1. ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में आने वाली 10 सबसे बड़ी बाधाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए.
2. प्रतिवर्ष 100 ब्रिक्स स्टार्टअप्स को अन्य सदस्य देशों के बाजारों में विस्तार करने में मदद दी जाए.
3. हर साल व्यापार और निवेश के क्षेत्र में 1,000 नई व्यावसायिक साझेदारियां स्थापित की जाएं.