अब टोल प्लाजा पर नहीं रुकना पड़ेगा! मार्च 2027 से बैरियर-फ्री टोलिंग, नितिन गडकरी ने बताया पूरा प्लान

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत में फरवरी-मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री टोलिंग शुरू करने का लक्ष्य है. इससे वाहन बिना रुके टोल पार करेंगे और FASTag व्यवस्था और तेज होगी.

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Kuldeep Sharma

हाईवे पर टोल देने के लिए वाहन चालकों को जल्द ही रुकना नहीं पड़ेगा. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार पूरी तरह डिजिटल और बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. इसका लक्ष्य अगले साल फरवरी-मार्च तक व्यवस्था शुरू करना है.

बिना रुके टोल पार करेंगे वाहन

नितिन गडकरी ने बताया कि पहले टोल प्लाजा पर वाहनों को औसतन करीब 12 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन FASTag आने के बाद समय में 80-90 प्रतिशत तक सुधार हुआ है. अब सरकार इससे भी आगे बढ़ना चाहती है. प्रस्तावित व्यवस्था में टोल प्लाजा पर कोई भौतिक बैरियर नहीं होगा और वाहन बिना रुके आगे निकल सकेंगे. मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम को मार्च तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है.

13 करोड़ से ज्यादा FASTag जारी

गडकरी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर FASTag की पहुंच 98 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है और अब तक 13 करोड़ से अधिक FASTag जारी किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि तेज टोलिंग से हर साल लोगों के समय की आर्थिक कीमत करीब ₹68,500 करोड़ आंकी गई है. इसके अलावा सालाना करीब 56 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होने का अनुमान है. इससे यात्रियों के समय और खर्च दोनों में कमी आएगी.


टोल आमदनी और डिजिटल सिस्टम को भी फायदा

केंद्रीय मंत्री का मानना है कि FASTag के साथ ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान तकनीक को जोड़ने से टोल वसूली और बेहतर हो सकती है. इससे सरकार को हर साल करीब ₹10,000 करोड़ अतिरिक्त टोल राजस्व मिलने की उम्मीद है. गडकरी ने फिनटेक कंपनियों से भी डिजिटल टोलिंग के क्षेत्र में काम करने और दुनिया के सफल मॉडलों का अध्ययन कर सरकार को उपयोगी सुझाव देने को कहा.

FASTag पोर्टेबिलिटी की सुविधा शुरू

नितिन गडकरी ने शुक्रवार को FASTag पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी लॉन्च की. इसके तहत वाहन मालिक अपना मौजूदा FASTag बदले बिना उसे नए बैंक खाते से लिंक कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि भारत के पास पहले से UPI, आधार और वाहन संबंधी डिजिटल जानकारी जैसी मजबूत व्यवस्थाएं हैं. अब इन्हें जोड़कर एक ऐसा डिजिटल नेटवर्क तैयार करने की जरूरत है, जिससे भविष्य में स्मार्ट और ज्यादा कुशल परिवहन व्यवस्था विकसित की जा सके.