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World Parkinson’s Day 2026: कंपकंपी और अकड़न को नजरअंदाज न करें, ये हो सकते हैं YOPD के शुरुआती संकेत

11 अप्रैल को विश्व पार्किंसंस दिवस पर इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जाता है. मस्तिष्क में डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाओं के खराब होने से यह रोग होता है.

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Edited By: Reepu Kumari
World Parkinson’s Day 2026: कंपकंपी और अकड़न को नजरअंदाज न करें, ये हो सकते हैं YOPD के शुरुआती संकेत
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: हर साल 11 अप्रैल को विश्व पार्किंसंस दिवस (World Parkinson’s Day) मनाया जाता है. इस मौके पर लोगों को इस न्यूरोलॉजिकल बीमारी के बारे में जागरूक करना जरूरी है, क्योंकि शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. जिसका ख्याल रखना बहुत जरुरी है नहीं तो आगे चलकर यहा आपको बहुत नुकसान कर सकता है. लेकिन अगर आप पहले से ही ख्याल रखें तो आप इस पर कंट्रोल पा सकते हैं.

कई रिपोर्ट्स के अनुसार पार्किंसंस तब होता है जब मस्तिष्क की डोपामाइन उत्पादक तंत्रिका कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं. इससे गति, संतुलन और समन्वय प्रभावित होता है. युवाओं में होने वाले यंग-ओनसेट पार्किंसंस (YOPD) के मामले तेजी से चर्चा में आ रहे हैं.

पार्किंसंस के शुरुआती लक्षण

बीमारी चाहे कोई भी हो अगर शुरुआती लक्षण दिखने पर ही ख्याल रखा जाए तो ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है. बीमारी के आरंभिक चरण में लक्षण बहुत हल्के होते हैं. हाथ या उंगलियों में आराम की स्थिति में हल्का कंपन, मांसपेशियों में अकड़न और धीमी गति सबसे आम संकेत हैं. लिखावट छोटी होना, चेहरे पर भाव कम दिखना और आवाज में बदलाव भी शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं.

YOPD यानी युवा उम्र में पार्किंसंस

40 साल से कम उम्र में होने वाले पार्किंसंस को यंग-ओनसेट पार्किंसंस कहते हैं. इसमें जेनेटिक म्यूटेशन, परिवार का इतिहास, पेस्टिसाइड या केमिकल्स का संपर्क और बार-बार सिर की चोट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. पुरुष और महिलाएं दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

क्या बचाव संभव है?

पार्किंसंस को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली मदद करती है. नियमित व्यायाम, फल-सब्जियों से भरपूर आहार, तनाव कम करना और हानिकारक केमिकल्स से दूर रहना जोखिम घटा सकता है. सिर की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें.

शुरुआती इलाज और प्रबंधन

अभी तक इस बीमारी का पूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआत में दवाओं से डोपामाइन की कमी पूरी की जा सकती है. फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और नियमित एक्सरसाइज लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित रखते हैं. उम्र और स्थिति के अनुसार डॉक्टर व्यक्तिगत प्लान बनाते हैं.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.