ब्लोटिंग, सूजन और ब्रेन फॉग; कहीं आप भी तो नहीं SIBO नामक बीमारी से हैं पीड़ित?
SIBO यानी स्मॉल इंटेस्टाइनल बैक्टीरियल ओवरग्रोथ एक ऐसी बीमारी है, जिसमें छोटी आंत में जरूरत से ज्यादा बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं. इसका असर केवल पाचन तक सीमित नहीं रहता
नई दिल्ली: आजकल पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और इन्हीं में एक नाम है SIBO. कई लोग लगातार गैस, पेट फूलना और कमजोरी को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसकी वजह गंभीर हो सकती है.
डॉक्टरों का कहना है कि SIBO सिर्फ डाइजेशन ही नहीं, बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता पर भी असर डालता है. इसी कारण इसे अब गट और ब्रेन के बीच कनेक्शन से जोड़कर देखा जा रहा है.
SIBO क्या है और कैसे होता है?
SIBO एक ऐसी स्थिति है, जिसमें छोटी आंत में बैक्टीरिया असामान्य रूप से बढ़ जाते हैं. आमतौर पर बैक्टीरिया बड़ी आंत में होते हैं, लेकिन जब वे छोटी आंत में पहुंच जाते हैं तो पाचन बिगड़ने लगता है. यह समस्या कमजोर पाचन, सर्जरी के बाद या लंबे समय तक दवाइयों के सेवन से हो सकती है.
ब्लोटिंग और सूजन की असली वजह
SIBO में बैक्टीरिया खाने को ठीक से पचने नहीं देते. इसके कारण गैस ज्यादा बनती है और पेट फूलने लगता है. कई लोगों को खाने के तुरंत बाद भारीपन और सूजन महसूस होती है. यही वजह है कि मरीज खुद को हर समय असहज महसूस करता है.
ब्रेन फॉग से क्यों जुड़ी है यह बीमारी
SIBO का असर दिमाग पर भी पड़ता है, जिसे ब्रेन फॉग कहा जाता है. इसमें ध्यान लगाने में परेशानी, भूलने की आदत और मानसिक थकान शामिल है. विशेषज्ञ मानते हैं कि आंतों में बनने वाले टॉक्सिन्स खून के जरिए दिमाग तक पहुंचकर यह स्थिति पैदा करते हैं.
किन लोगों में ज्यादा खतरा
जिन लोगों को पहले से पाचन से जुड़ी समस्या है, उनका जोखिम ज्यादा रहता है. डायबिटीज, थायरॉयड, कमजोर इम्युनिटी या बार-बार एंटीबायोटिक लेने वालों में SIBO की संभावना बढ़ जाती है. उम्र बढ़ने के साथ भी इसका खतरा देखा गया है.
पहचान और इलाज क्यों है जरूरी
SIBO की पहचान समय पर हो जाए तो इलाज आसान हो जाता है. डॉक्टर आमतौर पर सांस की जांच और लक्षणों के आधार पर इसका पता लगाते हैं. सही डाइट, दवाइयों और लाइफस्टाइल में बदलाव से ब्लोटिंग, सूजन और ब्रेन फॉग को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.
Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.