जंग के बीच ईरान की 'सीक्रेट' चाल, अमेरिका से साधा गुप्त संपर्क! क्या थम जाएगी विनाशकारी जंग?
ईरान ने गुप्त चैनलों के जरिए अमेरिका को शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया है. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे ठुकराते हुए कहा कि अब बहुत देर हो चुकी है. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के हमले अब भी लगातार जारी हैं.
नई दिल्ली: मध्य पूर्व की भीषण जंग अब पांचवें दिन में है. सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद ईरान गहरे संकट में है और उसने गोपनीय तरीके से अमेरिका तक कूटनीतिक पहुंच बनाने की कोशिश की है. ईरान ने विनाश को रोकने के लिए कुछ शर्तों पर बातचीत की पेशकश की है, लेकिन अमेरिका और इजरायल ने इस प्रस्ताव को अनसुना कर दिया है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि वे अब ईरान को सैन्य रूप से पूरी तरह समाप्त करने के बहुत करीब हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरान के खुफिया मंत्रालय के एजेंटों ने किसी तीसरे देश के माध्यम से अमेरिकी सीआईए से संपर्क साधा है. तेहरान अब युद्ध की भयावहता से बचने के लिए बातचीत की मेज पर आने को बेताब है. हालांकि. ईरान ने पश्चिमी देशों के प्रति अपना कड़ा रुख नहीं बदला है. लेकिन नेतृत्व की कमी और भारी सैन्य नुकसान ने उसे झुकने पर मजबूर कर दिया है. इजरायल लगातार अमेरिका पर इस प्रस्ताव को ठुकराने का दबाव बना रहा है.
ट्रंप की दो-टूक: अब बहुत देर हो गई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि ईरान की वायु रक्षा नौसेना और नेतृत्व सब कुछ खत्म हो चुका है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब ईरान की पूरी सैन्य शक्ति बिखर चुकी है. तब बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जाता. उनके अनुसार बातचीत का सही समय अब निकल चुका है. अब अमेरिका का लक्ष्य तेहरान की सैन्य व्यवस्था को जड़ से खत्म करना और निर्णायक जीत हासिल करना है.
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की सफलता
पेंटागन ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की प्रगति पर संतोष जताया है. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के मुताबिक चार दिनों के भीतर ही अमेरिकी वायु सेना ने ईरानी आसमान पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया है. उन्होंने बताया कि यह अभियान निर्दयता और सटीकता के साथ आगे बढ़ रहा है. अमेरिकी सेना ने ईरानी सेना की क्षमताओं को नष्ट करने के साथ-साथ उनका मनोबल भी तोड़ दिया है. यह अभियान अगले कुछ दिनों में ईरान की सैन्य शक्ति के पूर्ण सफाए के साथ समाप्त हो सकता है.
धरोहरों पर संकट और बढ़ता मृत्युदर
अल जजीरा के अनुसार युद्ध का दायरा ईरान के साथ-साथ लेबनान तक फैल गया है. अब तक इस संघर्ष में 800 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. बमबारी में रिहायशी इलाकों के साथ-साथ यूनेस्को विश्व धरोहर गोलेस्तान पैलेस को भी भारी क्षति पहुंची है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने इजरायल और अमेरिका पर सांस्कृतिक विनाश का आरोप लगाया है. कोम और बेरूत जैसे शहरों में लगातार हो रहे हमलों ने मानवीय संकट को और अधिक गहरा कर दिया है.
तेहरान में नेतृत्व संकट और गरिमा
अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान में भारी अव्यवस्था का माहौल है. शीर्ष नेताओं के मारे जाने से तेहरान की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. हालांकि खामेनेई के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम का कहना है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है. लेकिन वह अपनी गरिमा से समझौता नहीं करेगा. फिलहाल तेहरान में नेतृत्व का वैक्यूम बना हुआ है और आने वाले दिनों में गृह युद्ध या सरकार गिरने की आशंका भी प्रबल होती जा रही है.