फ्राइबर्ग विश्वविद्यालय और जिनेवा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक रिसर्च में दोपहर की छोटी झपकी के फायदे बताए हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि दिन में थोड़ी देर की नींद दिमाग को फिर से सक्रिय और तरोताजा बना सकती है. दिन भर जागने के दौरान हमारा दिमाग लगातार नई जानकारियां और अनुभव इकट्ठा करता रहता है. इस दौरान दिमाग की नसों के बीच बने कनेक्शन मजबूत होते जाते हैं. इन्हें साइनैप्स कहा जाता है. लेकिन एक समय के बाद दिमाग इतना भर जाता है कि नई चीजें सीखने और याद रखने की क्षमता कम होने लगती है. यहीं पर नींद एक बड़ा दाव खेलती है.
स्टडी के इसे साइनैप्टिक रीसेट बताया है. विज्ञानिकों की रिसर्म में कहा गया है कि छोटी झपकी दिमाग में जमा अतिरिक्त एक्टिविटी को संतुलित करती है और नई यादों के लिए जगह बनाती है. इससे दिमाग फिर से नई जानकारी सीखने के लिए तैयार हो जाता है. इस रिसर्च में 20 स्वस्थ युवाओं को शामिल किया गया. जिसके बाद उन्हें दो ग्रुप में बांटा गया. पहले ग्रुप ने दोपहर में करीब 45 मिनट की झपकी ली जबकि दूसरा ग्रुप जागता रहा. वैज्ञानिकों ने दिमाग की गतिविधियों को जांचने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया.
स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों ने झपकी ली उनके दिमाग में साइनैप्टिक एक्टिविटी संतुलित हो गई थी. साथ ही उनका दिमाग नई चीजें सीखने के लिए ज्यादा तैयार था. वहीं जो लोग जागते रहे उनमें यह क्षमता कम पाई गई. एक्सपर्ट के मुताबिक छोटी झपकी केवल थकान दूर नहीं करती बल्कि याददाश्त और फोकस भी बेहतर बनाती है. यही वजह है कि कई देशों में ऑफिस और कार्यस्थलों पर पावर नैप को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा एक्सपर्ट का कहना है कि 20 से 45 मिनट की झपकी सबसे ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है. इससे शरीर और दिमाग दोनों को आराम मिलता है लेकिन ज्यादा देर सोने से सुस्ती भी महसूस हो सकती है.
जो लोग देर रात तक काम करते हैं, पढ़ाई करते हैं या मानसिक तनाव में रहते हैं उनके लिए छोटी झपकी काफी फायदेमंद हो सकती है. यह मानसिक थकान कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करती है. बता दें की एक्सपर्ट का कहना है कि लगातार कम नींद लेने से दिमाग की क्षमता पर असर पड़ता है. इससे तनाव, भूलने की समस्या और मानसिक थकान बढ़ सकती है. इसलिए अच्छी नींद और छोटी झपकी दोनों ही दिमाग के लिए जरूरी मानी जाती हैं.