मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत सरकार की अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के प्रयास लगातार जारी है. इसी क्रम में रविवार सुबह एक जहाज 20 हजार टन एलपीजी लेकर कांडला स्थित दीनदयाल उपाध्याय बंदरगाह पर पहुंच गया. इस जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य में गोलाबारी से बचाने के लिए भारत सरकार के चार मंत्रालयों ने दिन रात जुटकर जो रणनीति बनाई, पूरी तरह सफल रही और यह जहाज ईरान- अमेरिका की नाकेबंदी को पार करते हुए भारत पहुंच गया.
बता दें कि मिडिल ईस्ट तनाव के चलते अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरू मध्य करीब ढाई माह से असुरक्षित बना हुआ है. मार्शल आईलैंड्स के ध्वज वाला जहाज “सिमी” भारत के लिए एलपीजी लेकर 13 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य से पार कर गया था. यह जहाज इंडियन ऑयल कार्पोरेशन के द्वारा कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से खरीदी गई 20 हजार टन एनपीजी लेकर भारत पहुंचा है.
A Marshall Islands-flagged tanker Symi carrying nearly 20,000 tonnes of LPG has arrived at Kandla Port. The vessel had crossed the Strait of Hormuz on May 13 before reaching India safely.#LPG #StraitofHormuz pic.twitter.com/95d6nRHqKu
— All India Radio News (@airnewsalerts) May 17, 2026
अमेरिकी और ईरानी नाकेबंदी के बीच से होर्मुज से जहाज पार कराने के लिए भारत को “एडवांस स्ट्रेटेजी” का सहारा लेना पड़ा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज के द्वारा अपनाई गई खास स्ट्रेटेजिक टैक्नोलॉजी के चलते रडार उसे लॉकेट करने में कामयाब नहीं हो सके और जहाज रडार निगरानी वाले युद्ध क्षेत्र को सुरक्षित रूप से पार करने में कामयाब रहा.
बंदगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल के मुताबिक एलपीजी लेकर आ रहे जहाज को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कराने के लिए डीजी शिपिंग, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच रहे राउंड द क्लॉक कोर्डिनेशन के बाद ही इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना संभव हो पाया. होर्मुज में आवाजाही प्रभावित होने से अब तक भारत आने वाला यह 13वां जहाज है.
बता दें कि “सिमी” के पीछे-पीछे वियतनाम के ध्वज वाला “एनवी सनशाइन” भी 46 हजार टन से अधिक ईंधन लेकर भारत के लिए रवाना हुआ है. एनवी शनशाइन (NV SunShine) न्यू मंगलौर बंदरगाह पर डॉक करेगा. दो खेपों में भारत पहुंच रही एनपीजी भारत के घरेलू बाजार के लिए काफी अहम साबित होने वाली है. बता दें कि तनाव के चलते जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारत के गैस भंडार में करीब 15 परसेंट की गिरावट आई है. कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केपलर का कहना है कि मिडिल ईस्ट तनाव से पहले भारत के पास 10.7 करोड़ बैरल कच्चे तेल का भंडार था, वर्तमान में यह भंडार 9.1 करोड़ बैरल है.