Tripti Dimri Film: अगर आप सस्पेंस, हॉरर और मिस्ट्री से भरी फिल्में पसंद करते हैं तो नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध 'बुलबुल' को जरूर देखें. यह 1 घंटे 34 मिनट की पीरियड हॉरर-ड्रामा फिल्म दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है. खास बात यह है कि यह सिर्फ डराने वाली कहानी नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक संदेश वाली फिल्म है. फिल्म की कहानी 1881 के बंगाल प्रेसीडेंसी में सेट है.
पुरानी हवेली, घने जंगल, लाल रोशनी और सन्नाटे भरा माहौल देखते ही मन में डर समा जाता है. सिनेमैटोग्राफी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है. हर फ्रेम इतना खूबसूरत और डरावना है कि आप स्क्रीन से नजरें हटाना भी भूल जाएंगे. निर्देशक अनुभव सिन्हा ने इस फिल्म को बेहद खास तरीके से बनाया है.
आज 'नेशनल क्रश' कहलाने वाली तृप्ति डिमरी 'बुलबुल' में अपनी पूरी ताकत दिखाती हैं. फिल्म में वे एक छोटी, डरी-सहमी नववधू से शुरू होकर हवेली की रहस्यमयी और शक्तिशाली ठाकुराइन बन जाती हैं. उनका ट्रांसफॉर्मेशन देखना वाकई कमाल का है. कई लोग इसे उनके करियर की सबसे पावरफुल परफॉर्मेंस मानते हैं. फिल्म में सिर्फ तृप्ति ही नहीं, बाकी कलाकार भी शानदार हैं.
अविनाश तिवारी सत्या के रोल में नजर आते हैं. 'लैला मजनू' के बाद तृप्ति-अविनाश की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों को पसंद आई. राहुल बोस दो अलग-अलग रोल में हैं और दोनों में उन्होंने कमाल किया है. पाओली दाम भी अपनी भूमिका में याद रह जाती हैं.
(बिना स्पॉइलर)'बुलबुल' कोई साधारण हॉरर फिल्म नहीं है जिसमें बिना वजह भूत-प्रेत डराते हों. यहां हर हत्या का एक कारण है. गांव में वे लोग ही मारे जाते हैं जो छोटी बच्चियों या महिलाओं के साथ गलत काम करते हैं. फिल्म इंसाफ की इस जंग को बेहद रोचक और सस्पेंस भरे अंदाज में दिखाती है. क्लाइमेक्स ऐसा है कि एक बार देखने के बाद भी दिमाग में घूमता रहता है. अंत तक पता नहीं चलता कि असल में क्या हो रहा है. सस्पेंस, ट्विस्ट और इमोशन का शानदार मिश्रण है.
फिल्म महिलाओं पर होने वाले अत्याचार और समाज की सोच पर भी सवाल उठाती है, लेकिन इसे कभी उपदेश की तरह नहीं पेश किया गया है.