मुंबई: 'द केरल स्टोरी 2' फिल्म अब एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है. पहले पार्ट की तरह ही इस सीक्वल को भी राजनीतिक और सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है. फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से U/A सर्टिफिकेट मिलने के बाद केरल में हंगामा मच गया है. फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह की यह फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' के नाम से रिलीज होने वाली है. यह 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में आने वाली है.
ट्रेलर रिलीज होते ही विवाद शुरू हो गया, क्योंकि इसमें लव जिहाद, जबरन धर्म परिवर्तन और आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों को दिखाया गया है. कहानी अब सिर्फ केरल तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान और मध्य प्रदेश की लड़कियों की भी घटनाओं को शामिल किया गया है. ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे कुछ लड़कियां प्यार के जाल में फंसकर धर्म बदलने पर मजबूर हो जाती हैं और देश की जनसंख्या पर असर डालने की साजिश रची जाती है.
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने फिल्म को खुलकर निशाना बनाया है. उन्होंने इसे झूठा प्रोपगेंडा बताया और कहा कि यह राज्य की सेक्युलर छवि को खराब करने की कोशिश है. राज्य में कई संगठनों और लोगों ने भी फिल्म के खिलाफ आवाज उठाई है. अब मामला केरल हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. कन्नूर जिले के चित्तरीपरम्बा निवासी श्रीदेव नंबूदरी नाम के एक व्यक्ति ने याचिका दायर की है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि ट्रेलर देखकर उनकी अंतरात्मा को गहरा आघात लगा. फिल्म केरल को गलत और नकारात्मक तरीके से पेश करती है, जबकि कहानी कई राज्यों की है. नाम 'द केरल स्टोरी' होने से पूरा दोष केरल पर डाला जा रहा है, जो राज्य की छवि बिगाड़ सकता है. इससे सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था की समस्या बढ़ सकती है. याचिका में CBFC द्वारा दिए गए सर्टिफिकेट को रद्द करने, फिल्म के टाइटल पर पुनर्विचार और रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है.
हाई कोर्ट ने याचिका पर गंभीरता से संज्ञान लिया और निर्माताओं, CBFC तथा केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अगली सुनवाई 24 फरवरी को होनी है. फिल्ममेकर्स का कहना है कि यह फिल्म वास्तविक घटनाओं पर आधारित है और समाज को जागरूक करने का प्रयास है. डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह ने U/A सर्टिफिकेट मिलने पर कहा था कि परिवार अपनी बहन-बेटियों के साथ इसे देखें. निर्माता विपुल शाह ने भी बोर्ड का शुक्रिया अदा किया और कहा कि यह फैसला सही है. लेकिन विरोधियों का मानना है कि फिल्म सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ सकती है.
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात जैसे संगठनों ने भी इसे फेक नैरेटिव बताया है. रिलीज से ठीक पहले यह कानूनी और राजनीतिक विवाद फिल्म की चर्चा तो बढ़ा रहा है, लेकिन रिलीज पर असर डाल सकता है. देखना यह है कि कोर्ट का फैसला क्या आता है और फिल्म थिएटर्स में बिना रुकावट पहुंच पाती है या नहीं. बॉलीवुड में ऐसे विवाद अक्सर बॉक्स ऑफिस पर असर डालते हैं, लेकिन पहले पार्ट की सफलता को देखते हुए मेकर्स उम्मीदें बांधे बैठे हैं.