मुंबई: भारतीय संगीत जगत के सबसे लोकप्रिय और बहुमुखी गायकों में शामिल सोनू निगम आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं. अपनी सुरीली आवाज, शानदार रेंज और भावपूर्ण गायकी से उन्होंने करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है. हिंदी ही नहीं, बल्कि 32 भाषाओं में 6000 से अधिक गाने गाकर उन्होंने भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई.
लेकिन यह मुकाम उन्हें आसानी से नहीं मिला. कभी शादियों और छोटे कार्यक्रमों में गाने वाले सोनू निगम ने लंबा संघर्ष किया, तब जाकर वह बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद प्लेबैक सिंगर्स में शामिल हुए.
सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को हरियाणा के फरीदाबाद में हुआ था. उनके पिता अगम कुमार निगम भी एक जाने-माने गायक रहे हैं. बचपन से ही घर का माहौल संगीत से जुड़ा था, इसलिए सोनू की रुचि भी गायकी की ओर बढ़ती चली गई. सिर्फ चार साल की उम्र में उन्होंने पहली बार मंच पर अपने पिता के साथ 'क्या हुआ तेरा वादा' गाना गाया. उनकी मासूम आवाज ने लोगों का दिल जीत लिया और यहीं से उनके संगीत सफर की शुरुआत हुई.
बचपन में सोनू अपने पिता के साथ शादियों, धार्मिक आयोजनों और छोटे-बड़े स्टेज शो में गाया करते थे. यही मंच उनके लिए सबसे बड़ी सीख साबित हुए. इन कार्यक्रमों ने न सिर्फ उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया, बल्कि लाइव परफॉर्मेंस की बारीकियां भी सिखाईं. बाद में यही अनुभव उनके प्रोफेशनल करियर की मजबूत नींव बना.
साल 1991 में सोनू निगम अपने पिता के साथ मुंबई पहुंचे. उनका सपना फिल्मों में गाना था, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें लगातार संघर्ष और रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात गुलशन कुमार से हुई. उन्हें 'रफी की यादें' एल्बम में मोहम्मद रफी के मशहूर गानों को अपनी आवाज देने का मौका मिला. इस एल्बम ने संगीत जगत में उनकी पहचान बनानी शुरू कर दी.
सोनू निगम को बड़ी पहचान 1995 में फिल्म 'बेवफा सनम' के गाने 'अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का' से मिली.
इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने दिए, जिनमें शामिल हैं—
इन गीतों ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे सफल प्लेबैक सिंगर्स की कतार में खड़ा कर दिया.