menu-icon
India Daily

Sunil Dutt Birthday: 113 मिनट तक पर्दे पर दिखा सिर्फ एक ही चेहरा, 62 साल बाद भी कोई नहीं तोड़ पाया सुनील दत्त का रिकॉर्ड

सुनील दत्त की फिल्म यादें भारतीय सिनेमा का एक अनोखा चैप्टर है. 1964 में रिलीज हुई इस फिल्म में सुनील दत्त ने एक्टर, डायरेक्टर और निर्माता की जिम्मेदारी अकेले निभाई थी. पूरी फिल्म में सिर्फ वही एक कलाकार नजर आए, जिसके कारण इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ.

babli
Edited By: Babli Rautela
Sunil Dutt Birthday: 113 मिनट तक पर्दे पर दिखा सिर्फ एक ही चेहरा, 62 साल बाद भी कोई नहीं तोड़ पाया सुनील दत्त  का रिकॉर्ड
Courtesy: Social Media

मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में बनी हैं जिन्होंने अपने समय से आगे जाकर नए प्रयोग किए हैं. कुछ फिल्मों ने तकनीक से लोगों को चौंकाया तो कुछ ने अपनी कहानी से नया इतिहास रचा है. लेकिन 62 साल पहले एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई थी जिसने सिनेमा की दुनिया में एक अनोखी मिसाल कायम कर दी. यह फिल्म थी यादें, जिसे बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर सुनील दत्त ने बनाया था. आज सुनील दत्त का जन्मदिन है. इस खास मौके पर उनकी उस फिल्म की चर्चा होना आम है जिसने उन्हें सिर्फ एक शानदार एक्टर ही नहीं बल्कि एक साहसी फिल्मकार के रूप में भी स्थापित किया. यादें ऐसी फिल्म थी जिसमें एक्टर, डायरेक्टप और निर्माता तीनों की जिम्मेदारी सुनील दत्त ने अकेले निभाई थी.

जब सुनील दत्त बनाई थी फिल्म

साल 1964 में रिलीज हुई यादें उस दौर की सबसे अलग फिल्मों में गिनी जाती है. उस समय फिल्मों में बड़े कलाकारों की लंबी फौज और भव्य सेट्स का दौर था. दर्शक भी कई कलाकारों वाली फिल्मों को पसंद करते थे. ऐसे समय में सुनील दत्त ने एक ऐसा प्रयोग किया जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं था. उन्होंने एक ऐसी कहानी चुनी जिसमें पूरी फिल्म में केवल एक व्यक्ति था. यही वजह रही कि फिल्म के अधिकांश हिस्से में केवल सुनील दत्त ही पर्दे पर दिखाई देते हैं. यह प्रयोग उस समय बेहद जोखिम भरा माना गया था, लेकिन उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता और कहानी की ताकत पर भरोसा किया.

अकेले कलाकार के दम पर चली पूरी कहानी

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें सिर्फ एक ही कलाकार दिखाई देता है. पूरी कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द गिर्द घूमती है जो अपने घर लौटता है और वहां अपनी पत्नी और बच्चों को नहीं पाता. उसे लगता है कि उसका परिवार उसे छोड़कर चला गया है. इस अकेलेपन के बीच वह अपने अतीत की यादों में खो जाता है. परिवार के साथ बिताए गए पल, रिश्तों की अहमियत और जीवन की गलतियों को याद करते हुए वह आत्ममंथन करता है.  कहानी आगे बढ़ने के साथ दर्शक उस व्यक्ति की भावनाओं, पछतावे और मानसिक संघर्ष को महसूस करते हैं. यही भावनात्मक गहराई फिल्म को खास बनाती है.

नरगिस की भी दिखी थी खास मौजूदगी

हालांकि पूरी फिल्म में सुनील दत्त ही नजर आते हैं, लेकिन आखिर में उनकी पत्नी और मशहूर एक्ट्रेस नरगिस की झलक दिखाई गई थी. यह झलक किसी अभिनय दृश्य के रूप में नहीं बल्कि एक तस्वीर के जरिए दिखाई गई थी. फिल्म में दूसरे कलाकारों की मौजूदगी केवल आवाजों और संवादों के माध्यम से महसूस होती है. यही कारण है कि दर्शकों का पूरा ध्यान सुनील दत्त के अभिनय और कहानी पर केंद्रित रहता है.