Dhadak 2: सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी की अपकमिंग फिल्म 'धड़क 2' आखिरकार 1 अगस्त 2025 को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है. लेकिन इस फिल्म का सफर आसान नहीं रहा है. निर्माण के दौरान कई बाधाओं और सेंसर बोर्ड की कैंची से गुजरते हुए यह फिल्म अब दर्शकों तक पहुंच रही है. क्या यह फिल्म अपनी मेहनत और कहानी के दम पर सफलता हासिल कर पाएगी? ये देखना काफी दिलचस्प होगा.
कई सीन्स-डायलॉग पर चली कैंची
'धड़क 2' एक रोमांटिक लव स्टोरी है, जो जातिगत भेदभाव जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे को छूती है. इस संवेदनशील विषय के कारण फिल्म को मेकिंग के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई, जिसके बाद कट्स और बदलाव किए गए. इन सबके बावजूद, फिल्म की कहानी और सिद्धांत-तृप्ति की जोड़ी को लेकर दर्शकों में एक्साइटमेंट बनी हुई है.
फिल्म की रिलीज से पहले एडवांस बुकिंग शुरू नहीं की गई है, जो इसे अन्य बड़ी रिलीज के सामने कमजोर स्थिति में ला सकता है. 'धड़क 2' का सीधा मुकाबला अजय देवगन की कॉमेडी फिल्म 'सन ऑफ सरदार 2' और फिल्म 'सैयारा' से है. जहां 'सन ऑफ सरदार 2' हल्की-फुल्की मनोरंजन की पेशकश करती है, वहीं 'सैयारा' भी दर्शकों का ध्यान खींच रही है. ऐसे में 'धड़क 2' के लिए बॉक्स ऑफिस पर अपनी जगह बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
फिल्म को क्यों करना पड़ा था अप्रूवल के लिए महीनों इंतजार?
'धड़क 2' की कहानी और इसके किरदारों की गहराई दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच सकती है. अब यह देखना बाकी है कि क्या यह फिल्म अपनी मुश्किलों को पार कर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा पाएगी. इस फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से मंजूरी पाने के लिए 6 महीने का लंबा इंतजार करना पड़ा. इस देरी और सेंसर बोर्ड की कैंची का कारण फिल्म की संवेदनशील कहानी और जातिगत भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दे हैं.
CBFC ने फिल्म को दिया U/A 16+ सर्टिफिकेट
'धड़क 2' एक रोमांटिक ड्रामा है, जो सामाजिक बाधाओं और जातिगत भेदभाव की पृष्ठभूमि में प्यार की कहानी बयान करती है. यह 2018 में रिलीज हुई 'धड़क' का सीक्वल है और तमिल फिल्म 'पेरियेरुम पेरुमल' से प्रेरित बताई जा रही है. फिल्म की कहानी में जाति से जुड़े संवाद, कुछ दृश्य और सामाजिक टिप्पणियां थीं, जिन्हें सेंसर बोर्ड ने आपत्तिजनक माना. CBFC ने फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट दिया, लेकिन इसके लिए 16 कट्स और संशोधन जरूरी बताए.