माइकल जैक्सन को गुरु मानकर खुद सीखा डांस, कैसे 'रमेश गोपी' से रेमो डिसूजा बने कोरियोग्राफर
रेमो डिसूजा ने बिना किसी ट्रेनिंग के डांस सीखा और आज बॉलीवुड के टॉप कोरियोग्राफर बन गए हैं. उनके जन्मदिन पर जानिए कैसे रमेश गोपी से रेमो बनने तक का उनका संघर्ष और सफलता भरा सफर प्रेरणा बन गया.
मुंबई: बॉलीवुड के मशहूर कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा आज 2 अप्रैल को अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं. डांस की दुनिया में उनका नाम आज एक ब्रांड बन चुका है. लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था. बिना किसी ट्रेनिंग के खुद से डांस सीखकर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जहां आज लाखों लोग उन्हें अपना गुरु मानते हैं.
बहुत कम लोग जानते हैं कि रेमो डिसूजा का असली नाम रमेश गोपी है. उनका जन्म 2 अप्रैल 1974 को बेंगलुरु में हुआ था. बचपन में उन्हें अपने नाम से खास लगाव नहीं था. बड़े होने पर उन्होंने अपने माता पिता की अनुमति लेकर अपना नाम बदलकर रेमो रख लिया. यही नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया.
बिना ट्रेनिंग के रेमो ने सीखा डांस
रेमो की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने कभी भी किसी से डांस की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली. वह बचपन से ही पॉप के किंग माइकल जैक्सन को अपना गुरु मानते थे. उनके वीडियो देखकर ही उन्होंने डांस सीखना शुरू किया. धीरे धीरे उन्होंने अपने स्टाइल को खुद विकसित किया और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई.
मुंबई में संघर्ष के दिनों में रेमो डिसूजा को फिल्म रंगीला में डांस करने का मौका मिला. इस फिल्म में आमिर खान और उर्मिला मातोंडकर मुख्य भूमिका में थे. यहीं से रेमो की किस्मत बदली और उन्होंने कोरियोग्राफर अहमद खान के साथ काम करना शुरू किया. इसके बाद उन्होंने सोनू निगम के एल्बम दीवाना को कोरियोग्राफ किया, जो जबरदस्त हिट रहा.
कोरियोग्राफर से डायरेक्टर तक का सफर
रेमो ने सिर्फ डांस तक खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने कई बड़ी फिल्मों का निर्देशन भी किया. उनकी चर्चित फिल्मों में एबीसीडी, एबीसीडी 2, अ फ्लाइंग जट्ट, स्ट्रीट डांसर 3डी, रेस 3 जैसी फिल्में शामिल हैं. इन फिल्मों ने उन्हें एक सफल डायरेक्टर के रूप में भी पहचान दिलाई.
रेमो की पर्सनल लाइफ भी काफी दिलचस्प रही है. उन्होंने लिजेल से शादी की है. एक बार शो डांस इंडिया डांस में उन्होंने बताया था कि स्ट्रगल के दिनों में वह अपनी पत्नी को रोज 100 मिस्ड कॉल करते थे. उस समय एक मिनट की कॉल के लिए 16 रुपये खर्च होते थे, इसलिए वह मिस्ड कॉल से ही अपनी बात जताते थे.