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रणवीर सिंह की 'डॉन 3' विवाद कोर्ट पहुंचा, वेटरन प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने उठाए सवाल

टीपी अग्रवाल ने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयीज और इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के खिलाफ याचिका दाखिल की है. उन्होंने कहा कि कोई भी ट्रेड बॉडी, एसोसिएशन या व्यक्ति को कानूनी रूप से यह अधिकार नहीं है कि वह इंडस्ट्री के सदस्यों को किसी खास व्यक्ति के साथ काम न करने का निर्देश दें.

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Edited By: Antima Pal
रणवीर सिंह की 'डॉन 3' विवाद कोर्ट पहुंचा, वेटरन प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने उठाए सवाल
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Ranveer Singh Don 3 Row: बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और 'डॉन 3' फिल्म के बीच चल रहे विवाद ने अब कोर्ट का रास्ता पकड़ लिया है. वरिष्ठ फिल्म प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने बॉम्बे सिविल कोर्ट, दिंडोशी में एक याचिका दायर की है. इसमें उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की संस्थाओं द्वारा किसी कलाकार या व्यक्ति पर बैन लगाने और नॉन-कोऑपरेशन निर्देश जारी करने की प्रथा पर सवाल उठाया है.

रणवीर सिंह की 'डॉन 3' विवाद कोर्ट पहुंचा

टीपी अग्रवाल ने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयीज और इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के खिलाफ याचिका दाखिल की है. उन्होंने कहा कि कोई भी ट्रेड बॉडी, एसोसिएशन या व्यक्ति को कानूनी रूप से यह अधिकार नहीं है कि वह इंडस्ट्री के सदस्यों को किसी खास व्यक्ति के साथ काम न करने का निर्देश दें.

वेटरन प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने उठाए सवाल

याचिका में कहा गया है कि ऐसी बंदिशें पेशेवर स्वतंत्रता और निष्पक्ष कामकाज के सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं. कोर्ट ने FWICE और IMPPA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह मामला तब सामने आया जब FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन निर्देश जारी किया. यह निर्देश फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रोडक्शन कंपनी के साथ 'डॉन 3' को लेकर चल रहे विवाद के बाद आया.

रणवीर सिंह इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थे, लेकिन कुछ मुद्दों के चलते प्रोजेक्ट अटक गया. टीपी अग्रवाल हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बहुत सम्मानित नाम हैं. उन्होंने IMPPA की अध्यक्षता 17 साल तक की और फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद पर चार बार चुने गए. फिलहाल वे दोनों संगठनों के पैट्रन हैं. उनका कहना है कि दशकों से इंडस्ट्री की संस्थाएं विवाद सुलझाने और अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं, लेकिन अब ब्लैंकेट बैन और बॉयकॉट जैसे कदमों की कानूनी वैधता पर सवाल उठने लगे हैं.

अग्रवाल की याचिका में जोर दिया गया है कि कोई भी संगठन अपने सदस्यों पर दबाव नहीं बना सकता कि वे किसी कलाकार के साथ काम करें या न करें. इससे कलाकारों की आजीविका और करियर पर सीधा असर पड़ता है. यह घटनाक्रम बॉलीवुड में एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है. कई लोग मानते हैं कि इंडस्ट्री की संस्थाओं को कलाकारों के बीच झगड़ों में हस्तक्षेप करने के बजाय सिर्फ सहयोग और मध्यस्थता तक सीमित रहना चाहिए.