70 के दशक की वो हीरोइन जिसके ग्लैमर से छोड़ा सबको पीछे, खूबसूरती में एवरग्रीन रेखा को भी देती थी मात
मौसमी चटर्जी जिन्होंने कम उम्र में फिल्मों में कदम रखा और शादी के बाद भी अपना करियर ऊंचाई पर पहुंचाया. उनकी सादगी और दमदार अभिनय ने उन्हें 70 और 80 के दशक की सबसे बड़ी एक्ट्रेसेस में शामिल कर दिया.
मुंबई: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी एक्ट्रेसेस रही हैं जिन्होंने अपने अंदाज से दर्शकों के दिलों पर राज किया. लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो समय के साथ और भी खास बन जाते हैं. मौसमी चटर्जी उन्हीं चुनिंदा एक्ट्रेसेस में से एक हैं. मौसमी ने 70 के दशक में अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी मासूमियत, सादगी और शानदार अभिनय ने उन्हें उस दौर की सबसे अलग और मजबूत एक्ट्रेस बना दिया.
मौसमी चटर्जी ने बहुत कम उम्र में ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था. उन्होंने सबसे पहले बंगाली सिनेमा में काम किया और वहीं से अपनी पहचान बनानी शुरू की. उस समय इंडस्ट्री में टिके रहना आसान नहीं था, लेकिन उनकी प्रतिभा ने उन्हें जल्द ही अलग पहचान दिला दी. उनका अभिनय इतना स्वाभाविक था कि दर्शक उनसे तुरंत जुड़ जाते थे.
शादी के बाद भी नहीं रुका करियर
उस दौर में यह माना जाता था कि शादी के बाद एक्ट्रेसेस का करियर खत्म हो जाता है. लेकिन मौसमी चटर्जी ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने मशहूर संगीतकार हेमंत कुमार के बेटे जयंत मुखर्जी से शादी की और उसके बाद बॉलीवुड में कदम रखा. शादी के बाद भी उन्होंने लीड हीरोइन के तौर पर काम किया और यह साबित किया कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर कोई भी महिला अपने सपनों को पूरा कर सकती है.
मौसमी चटर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी नैचुरल एक्टिंग थी. उनके चेहरे की मासूमियत और आंखों की भावनाएं दर्शकों को सीधे दिल तक छू जाती थीं. जब वे पर्दे पर रोती थीं तो दर्शक भी भावुक हो जाते थे. 70 के दशक में जहां रेखा अपने ग्लैमरस अंदाज के लिए मशहूर थीं, वहीं मौसमी चटर्जी अपनी सादगी और अभिनय के दम पर उन्हें कड़ी टक्कर देती थीं.
बड़े सितारों के साथ दीं सुपरहिट फिल्में
मौसमी चटर्जी ने अपने करियर में कई बड़े सितारों के साथ काम किया. उनकी जोड़ी शशि कपूर, जितेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ खूब पसंद की गई. उन्होंने सामाजिक और पारिवारिक फिल्मों में भी काम किया. रोटी कपड़ा और मकान जैसी फिल्मों में उनका काम आज भी याद किया जाता है. उनकी फिल्मों में सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि समाज की झलक भी देखने को मिलती थी.