मुंबई: कर्नाटक हाई कोर्ट ने बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह को 'कांतारा 2' में दैव वाले सीन की मिमिक्री को लेकर विवाद में बड़ी राहत दी है. अदालत ने निर्देश दिया है कि 2 मार्च तक उनके खिलाफ कोई सख्त या जबरदस्त कार्रवाई नहीं की जाएगी. यह मामला पिछले साल गोवा में आयोजित 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया से जुड़ा है. दरअसल IFFI के क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान रणवीर सिंह ने मंच पर कन्नड़ सुपरहिट फिल्म 'कांतारा: चैप्टर 1' के एक प्रसिद्ध सीन की नकल की थी.
उन्होंने फिल्म में ऋषभ शेट्टी द्वारा निभाए गए किरदार की नकल करते हुए स्थानीय देवता (दैव) को 'मादा भूत' जैसा संबोधित कर दिया था. इस हरकत से कुछ लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई. पुलिस ने FIR भी दर्ज की, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा.
रणवीर सिंह ने इस FIR को रद्द करने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की. मंगलवार (24 फरवरी 2026) को इस याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की बेंच ने मामले में नोटिस जारी किया और राज्य सरकार से जवाब मांगा. साथ ही अगली सुनवाई 2 मार्च तक तय की गई. कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक मामला आगे नहीं सुनता, पुलिस या राज्य रणवीर के खिलाफ कोई जबरदस्ती की कार्रवाई (जैसे गिरफ्तारी या जबरन जांच) नहीं लेगी, बशर्ते रणवीर जांच में सहयोग करें.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रणवीर सिंह को कड़ी फटकार भी लगाई. जज ने कहा- 'आप रणवीर सिंह हो सकते हैं, लेकिन बड़े स्टार होने से आप कानून से ऊपर नहीं हो जाते.' उन्होंने आगे कहा कि एक अभिनेता की बातों का समाज पर बहुत असर पड़ता है. 'लापरवाही से बोलना ठीक नहीं. इंटरनेट कभी नहीं भूलता. शब्द वापस लिए जा सकते हैं, लेकिन डिजिटल दुनिया में डाला गया कंटेंट हमेशा रहता है.'
कोर्ट ने जोर दिया कि सार्वजनिक मंच पर बोलते समय बहुत सोच-समझकर बोलना चाहिए. चाहे कोई बड़ा स्टार हो या आम आदमी, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं है. रणवीर सिंह के वकील ने कोर्ट में माना कि उनकी हरकत गलत थी और उन्होंने पहले ही सोशल मीडिया पर माफी मांग ली है. लेकिन कोर्ट ने कहा कि माफी से शब्द मिट नहीं जाते. अब यह तय होगा कि यह जानबूझकर किया गया था या अनजाने में. अब सभी की नजरें 2 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि आगे क्या होता है.