Kailash Kher Birthday: कैलाश खेर आज भारतीय संगीत जगत में सूफी और रूहानी गीतों के सबसे मशहूर नामों में से एक हैं. उनकी आवाज सुनते ही लगता है कि कोई दूसरा गायक नहीं हो सकता. लेकिन इस पहचान के पीछे उनकी जिंदगी संघर्ष, नुकसान और डिप्रेशन से भरी हुई है. बता दें कि कैलाश खेर का जन्म 7 जुलाई 1973 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक कश्मीरी हिंदू परिवार में हुआ. उनके पिता लोक गायक थे, इसलिए बचपन से ही संगीत उनके खून में था.
कैलाश खेर ने संगीत के साथ-साथ एक दोस्त के साथ हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरू किया था, लेकिन बिजनेस बुरी तरह फेल हो गया. भारी नुकसान हुआ. इस झटके से वे डिप्रेशन में चले गए और जीवन समाप्त करने तक का सोचने लगे. इस कठिन समय में वे ऋषिकेश चले गए. गंगा किनारे साधु-संतों के साथ समय बिताया. भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक माहौल ने उन्हें नई ऊर्जा दी. यहीं उन्होंने फैसला किया कि अब वह पूरी तरह संगीत को समर्पित होंगे.
कैलाश खेर 2001 में वे मुंबई आए. शुरुआत में छोटे-मोटे काम और जिंगल्स गाए. 2004 में फिल्म ‘अंदाज’ के गाने ‘रब्बा इश्क ना होवे’ से उन्हें पहचान मिली. फिर आया उनका सबसे बड़ा हिट गाना ‘अल्लाह के बंदे हंस दे’. इस गाने ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया. उन्होंने ‘कैलासा’ नाम से बैंड बनाया और सूफी संगीत को आधुनिक रूप दिया. ‘तेरी दीवानी’, ‘सैयां’, ‘बम लहरी’ जैसे गाने उनके करियर की शान हैं. उन्होंने 20 से ज्यादा भाषाओं में 700 से अधिक गाने गाए हैं.
उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला. फिल्मफेयर अवॉर्ड समेत कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी उनके नाम हैं. कैलाश खेर की कहानी सिखाती है कि मेहनत और पैशन से कोई भी मुश्किल को पार कर सकता है. आज वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं.