मुंबई: मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं. हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब खींचने की घटना के बाद जावेद का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में जावेद हिजाब या बुर्के की प्रथा पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं. वीडियो नवंबर 2025 में भुवनेश्वर के SOA लिटरेरी फेस्टिवल का है, जहां वे मुख्य अतिथि थे.
फेस्टिवल में एक छात्रा ने जावेद से पूछा कि क्या चेहरा ढकने वाली महिला कमजोर होती है? जवाब में जावेद ने कहा कि महिलाओं का चेहरा ढकने की क्या तर्कसंगत वजह है? उन्होंने पूछा, "महिला के चेहरे में ऐसा क्या गलत या शर्मनाक है जो उसे छिपाना पड़ता है? क्या वह अपने चेहरे से नफरत करती है या शर्मिंदगी महसूस करती है?"
Every one who knows me even in the most cursory manner knows how much I am against the traditional concept of Parda but it doesn’t mean that by any stretch of imagination I can accept what Mr Nitish Kumar has done to a Muslim lady doctor . I condemn it in very strong words . Mr…
— Javed Akhtar (@Javedakhtarjadu) December 18, 2025
जावेद ने इसे सोशल कंडीशनिंग और पीयर प्रेशर बताया. उनका कहना था कि अगर महिला को सच में चुनाव की आजादी दी जाए, तो ज्यादातर मामलों में यह प्रथा समाज का दबाव होती है, न कि व्यक्तिगत पसंद. वे बोले कि महिलाएं जो इसे चुनाव बताती हैं, वे ब्रेनवॉश्ड हो चुकी हैं. यह वीडियो नीतीश कुमार की घटना के बाद वायरल हुआ.
पटना में एक सरकारी कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने एक महिला डॉक्टर का हिजाब नीचे खींच दिया था. महिला अपॉइंटमेंट लेटर लेने आई थीं. इस हरकत की चारों तरफ निंदा हुई. कई नेताओं, एक्ट्रेस जायरा वसीम और आम लोगों ने नीतीश से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की. जावेद अख्तर ने अपने विचारों पर कायम रहते हुए स्पष्टीकरण दिया.
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा कि जो लोग उन्हें जानते हैं, वे जानते हैं कि वे पारंपरिक पर्दा प्रथा के सख्त खिलाफ हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वे नीतीश कुमार की इस हरकत को सही मानते हैं. जावेद ने इसे गलत बताया और कड़ी निंदा की. उन्होंने लिखा, "मैं इसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूं. नीतीश कुमार को उस महिला से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए." जावेद का यह स्पष्टीकरण सराहा जा रहा है. लोग कह रहे हैं कि वे अपने सिद्धांतों पर अड़े हैं, लेकिन महिलाओं की गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान भी करते हैं.