मुंबई: डेविड धवन और वरुण धवन की जोड़ी जब भी बड़े पर्दे पर आती है तो दर्शकों को भरपूर मनोरंजन और कॉमेडी की उम्मीद रहती है. इसी उम्मीद के साथ रिलीज हुई है फिल्म है जवानी तो इश्क होना है. फिल्म में वरुण धवन के साथ मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मनीष पॉल, जिमी शेरगिल, चंकी पांडे और मौनी रॉय जैसे कलाकार नजर आए हैं. हालांकि यह फिल्म पूरी तरह मनोरंजन के मकसद से बनाई गई है, लेकिन इसका असर हर जगह समान नहीं दिखाई देता. फिल्म की कहानी जस नाम के एक युवक के इर्द गिर्द घूमती है, जिसका किरदार वरुण धवन ने निभाया है. उसकी शादी बानी से हुई है, लेकिन दोनों के रिश्ते में कई तरह की परेशानियां हैं. हालात ऐसे बनते हैं कि दोनों अलग होने की कगार पर पहुंच जाते हैं. इसी दौरान जस की जिंदगी में प्रीत की एंट्री होती है और यहीं से कहानी में नया मोड़ आता है.
जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है, गलतफहमियों, रिश्तों और पारिवारिक उलझनों का ऐसा सिलसिला शुरू होता है जो फिल्म को पूरी तरह कॉमिक दिशा में ले जाता है. फिल्म में अफरातफरी से पैदा होने वाली कॉमेडी है जिसके लिए डेविड धवन जाने जाते हैं. फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका पहला हाफ है. शुरुआती एक घंटे में कहानी बहुत धीमी गति से आगे बढ़ती है और कई सीन दर्शकों को बांधने में असफल नजर आते हैं. कई कॉमिक सीन ऐसे हैं जो उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ते. यही वजह है कि शुरुआत में फिल्म थोड़ी बोझिल महसूस होती है.
इंटरवल के बाद फिल्म का माहौल बदलता है. कहानी में तेजी आती है और कई ऐसे सीन सामने आते हैं जो दर्शकों को हंसाने में सफल रहते हैं. दूसरे हाफ में फिल्म अपनी लय पकड़ती हुई दिखाई देती है और कई डायलॉग दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं. फिल्म के डायलॉग की बात करें तो कुछ संवाद काफी मनोरंजक हैं. फिल्म का हास्य दोहरे अर्थ वाले संवादों और स्थितियों पर आधारित है, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसे सीमित रखा गया है. यही कारण है कि फिल्म परिवार के साथ देखी जा सकने वाली कॉमेडी बनी रहती है.
एक्टिंग पर वरुण धवन अपनी पुरानी कॉमिक शैली में नजर आते हैं. उनकी ऊर्जा, बॉडी लैंग्वेज और कॉमिक टाइमिंग फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है. कई दृश्य केवल उनकी मौजूदगी की वजह से मनोरंजक बन जाते हैं. वरुण ने एक बार फिर साबित किया है कि हल्की फुल्की कॉमेडी फिल्मों में उनकी पकड़ मजबूत है.
मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है. हालांकि स्क्रिप्ट उन्हें बहुत अधिक अवसर नहीं देती, फिर भी दोनों कलाकार अपनी भूमिकाओं में प्रभाव छोड़ती हैं. दोनों की स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को आकर्षक बनाती है.
मनीष पॉल सीमित स्क्रीन टाइम में नजर आते हैं, लेकिन जहां भी दिखाई देते हैं, वहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करते हैं. वहीं जिमी शेरगिल का गंभीर अंदाज कहानी में अलग रंग जोड़ता है.