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इंटीमेट सीन से पहले सेट से कहां चले गए थे इरफान खान? दिव्या दत्ता ने खोली एक्टर की पोल

दिव्या दत्ता ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म हिस्स में इंटीमेट सीन से पहले इरफान खान कितने नर्वस हो गए थे. उन्होंने सेट से दूर जाकर खुद को संभाला और फिर सीन को बेहद संवेदनशील तरीके से फिल्माया गया.

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Edited By: Babli Rautela
इंटीमेट सीन से पहले सेट से कहां चले गए थे इरफान खान? दिव्या दत्ता ने खोली एक्टर की पोल
Courtesy: Social Media

मुंबई: बॉलीवुड की सशक्त एक्ट्रेसेस में शामिल दिव्या दत्ता ने हाल ही में अपने करियर से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए. उन्होंने बताया कि पहले के दौर में इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती थी. कलाकारों को खुद ही एक दूसरे की सहजता और भावनाओं का ध्यान रखना पड़ता था. आज के समय में जहां इंटीमेट सीन के लिए पूरी टीम और गाइडलाइन होती है, वहीं पहले भरोसा और समझ ही सबसे बड़ा सहारा हुआ करता था.

दिव्या दत्ता ने दिवंगत एक्टर इरफान खान के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए बताया कि फिल्म हिस में एक बेहद भावनात्मक और रोमांटिक सीन था. यह सीन एक निःसंतान दंपती की पीड़ा और उनके आपसी प्रेम को दिखाता है. दिव्या ने बताया कि सीन की भावनात्मक गहराई इतनी ज्यादा थी कि वह खुद भी काफी नर्वस थीं. उस समय उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैमरे के सामने इस सीन को कैसे निभाया जाए.

इंटीमेट सीन से पहले छत पर चले गए थे इरफान

दिव्या दत्ता के अनुसार इरफान खान भी उस सीन को लेकर काफी असहज महसूस कर रहे थे. सीन शूट होने से पहले वह कुछ देर के लिए सेट छोड़कर छत पर जाकर बैठ गए थे ताकि खुद को मानसिक रूप से तैयार कर सकें. यह दिखाता है कि इरफान सिर्फ एक महान एक्टर ही नहीं बल्कि बेहद संवेदनशील इंसान भी थे, जो हर सीन को पूरी ईमानदारी और सम्मान के साथ निभाना चाहते थे.

दिव्या ने बताया कि उस समय इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर नहीं होते थे. सेट पर मौजूद हर व्यक्ति चाहता था कि सीन खूबसूरत और सच्चा लगे. आधा क्रू विदेशी था और आधा भारतीय, लेकिन सभी की कोशिश थी कि कलाकार सहज महसूस करें. उन्होंने कहा कि यह सीन सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक था. इसलिए संवाद कम और भावनाएं ज्यादा जरूरी थीं. इसी समझदारी की वजह से सीन को गरिमा के साथ फिल्माया गया.

डायरेक्टर की भूमिका रही अहम

इस सीन को फिल्म की डायरेक्टर जेनिफर लिंच  ने बेहद संवेदनशील तरीके से हैंडल किया. दिव्या ने बताया कि डायरेक्टर की स्पष्ट सोच और कलाकारों पर भरोसे ने माहौल को सहज बनाया. डायरेक्टर ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी कलाकार असहज न हो और सीन की भावना बरकरार रहे.

दिव्या दत्ता ने कहा कि इरफान खान हर सीन को एक जिम्मेदारी की तरह लेते थे. वह यह समझते थे कि पर्दे पर दिखने वाला हर पल दर्शकों को प्रभावित करता है. इसलिए वह किसी भी सीन को हल्के में नहीं लेते थे. उनकी यही ईमानदारी उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी. इरफान के साथ काम करना सीखने जैसा अनुभव था.