पॉपुलर वेब सीरीज एस्पिरेंट्स का तीसरा सीजन आखिरकार दर्शकों के सामने आ चुका है. दो सफल सीजन के बाद इस शो को लेकर दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं. इस बार कहानी में अभिलाष शर्मा और संदीप भैया के बीच का टकराव सबसे बड़ा आकर्षण बनकर सामने आता है. कहानी की शुरुआत उस तनाव से होती है जब संदीप भैया अभिलाष पर एक गंभीर आरोप लगाते हैं. उनका कहना है कि रामपुर के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में काम कर रहे अभिलाष ने एक टेंडर पास करते समय अपने दोस्त गुरी का पक्ष लिया.
यह आरोप कहानी में बड़ा मोड़ लाता है. अभिलाष इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हैं और खुद को निर्दोष साबित करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं. इसी संघर्ष के बीच कहानी आगे बढ़ती है और कई दिलचस्प मोड़ सामने आते हैं.
एस्पिरेंट्स 3 की खास बात यह है कि इसमें वर्तमान की प्रशासनिक चुनौतियों के साथ साथ मुखर्जी नगर के दिनों की यादों को भी जोड़ा गया है. यह मिश्रण कहानी को भावनात्मक गहराई देता है. सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे पुराने दोस्त और सपने आज की जिम्मेदारियों के बीच एक अलग मायने रखते हैं. यह संतुलन कहानी को और भी दिलचस्प बनाता है. कई सीन ऐसे हैं जो दर्शकों को भावुक भी करते हैं और साथ ही सस्पेंस भी बनाए रखते हैं. यही वजह है कि दर्शक हर एपिसोड के साथ कहानी में और ज्यादा जुड़ते चले जाते हैं.
एस्पिरेंट्स 3 की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेज रफ्तार कहानी है. शो शुरुआत से ही मुख्य टकराव को सामने ले आता है और दर्शकों को कहानी में बांध लेता है. इसके अलावा सीरीज का बैकग्राउंड म्यूजिक भी काफी प्रभावी है जो कई दृश्यों को और ज्यादा असरदार बना देता है. कहानी में मौजूद सस्पेंस और अप्रत्याशित मोड़ इसे और रोमांचक बनाते हैं. निर्देशन भी काफी संतुलित है और हर किरदार को अपनी जगह पर उभरने का मौका मिलता है.
हालांकि सीरीज कई मामलों में मजबूत नजर आती है लेकिन इसमें कुछ कमियां भी दिखाई देती हैं. अभिलाष और दीपा के बीच का रोमांटिक ट्रैक थोड़ा जल्दबाजी में खत्म होता हुआ महसूस होता है. इस वजह से उनके रिश्ते की भावनात्मक गहराई उतनी मजबूत नहीं बन पाती जितनी दर्शक उम्मीद करते हैं.