मुंबई: भारतीय संगीत जगत की दो महान आवाजें आशा भोसले और लता मंगेशकर लंबे समय तक एक ही इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं. दोनों बहनों के बीच का रिश्ता जितना गहरा था उतना ही उनकी तुलना भी की जाती थी. यही तुलना एक समय आशा भोसले के लिए मानसिक दबाव का कारण बन गई थी.
अपने शुरुआती दिनों में आशा भोसले की आवाज लता मंगेशकर से काफी मिलती थी. यही बात उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई. कई बार लोग उनकी आवाज को लता की आवाज समझ लेते थे और इसी वजह से उनकी अलग पहचान बन पाना मुश्किल हो रहा था.
एक बार ऐसा हुआ जब एक व्यक्ति ने गलती से लता मंगेशकर के गाने को आशा भोसले की आवाज समझ लिया. इस छोटी सी घटना ने आशा को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्हें एहसास हुआ कि अगर वह इसी तरह गाती रहीं तो उनकी अपनी कोई पहचान नहीं बन पाएगी. इस घटना के बाद आशा भोसले को यह डर सताने लगा कि जब तक लता मंगेशकर इंडस्ट्री में सक्रिय हैं तब तक उन्हें काम नहीं मिलेगा. यह डर इतना गहरा था कि कई रातों तक उन्हें नींद नहीं आई. लेकिन यही डर उनके लिए एक नई शुरुआत का कारण भी बना.
आशा भोसले ने तय किया कि वह अपनी आवाज और गाने के अंदाज को पूरी तरह बदलेंगी. उन्होंने अलग अलग तरह के संगीत को सीखना शुरू किया. उन्होंने फिल्मी गानों के साथ साथ पॉप गाने गाए गजल सीखी भजन गाए और यहां तक कि लोक संगीत और कव्वाली में भी खुद को आजमाया. उन्होंने सिर्फ भारतीय संगीत तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि पश्चिमी संगीत को भी समझने की कोशिश की. अंग्रेजी फिल्मों को देखकर उन्होंने यह सीखा कि आवाज को अलग तरह से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है. यही प्रयोग आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया.
लगातार मेहनत और नए प्रयोगों की बदौलत आशा भोसले ने अपनी अलग पहचान बना ली. उन्होंने हजारों गाने गाए और कई भाषाओं में अपनी आवाज दी. यही वजह है कि उनके नाम सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने का बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हुआ. आशा भोसले ने खुद माना था कि उनके और लता मंगेशकर के बीच एक कॉम्पिटिशन जरूर थी. लेकिन यह कॉम्पिटिशन नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मक थी. जब भी दोनों साथ में काम करती थीं तो दोनों यह सोचती थीं कि गाने में कुछ नया कैसे जोड़ा जाए.