आमिर खान की फिल्म रंग दे बसंती को रिलीज हुए करीब दो दशक हो चुके हैं, लेकिन फिल्म से जुड़े किस्से आज भी लोगों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं. 2006 में रिलीज हुई इस फिल्म में आमिर खान के साथ सिद्धार्थ, आर. माधवन, शरमन जोशी और कुणाल कपूर जैसे कलाकार नजर आए थे. अब अभिनेता सिद्धार्थ ने फिल्म के क्लाइमैक्स से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है.
सिद्धार्थ ने बताया कि फिल्म के आखिरी हिस्से की शूटिंग से ठीक एक दिन पहले सीन में बदलाव किया गया था. यह बदलाव आमिर खान के सुझाव के बाद हुआ और इसके लिए सिद्धार्थ को क्लाइमैक्स में पहले से अलग भूमिका निभानी पड़ी.
सिद्धार्थ ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि फिल्म के मूल क्लाइमैक्स में पांचों युवाओं को रेडियो स्टेशन पर अपनी बात रखने का मौका मिलना था. यानी सभी किरदारों को माइक्रोफोन के सामने बोलना था. लेकिन आमिर खान को लगा कि इस सीन को अलग तरीके से किया जा सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि माइक्रोफोन पर एक ही व्यक्ति होना चाहिए. सिद्धार्थ के मुताबिक, आमिर का मानना था कि पूरी फिल्म में उनका किरदार ज्यादा नहीं बोलता और अगर क्लाइमैक्स में वही बोलता है तो सीन का असर ज्यादा बेहतर हो सकता है. इस सुझाव के बाद क्लाइमैक्स की स्क्रिप्ट में बदलाव किया गया.
सिद्धार्थ के लिए यह बदलाव आसान नहीं था, क्योंकि शूटिंग के लिए उनके पास तैयारी का ज्यादा समय नहीं था. उन्होंने बताया कि जब वह सेट पर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि क्लाइमैक्स अब पहले वाली स्क्रिप्ट के मुताबिक नहीं होने वाला है. हालांकि, उन्होंने बिना तैयारी के सीन शूट नहीं किया. सिद्धार्थ और फिल्म के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने रात में बैठकर नए सीन की तैयारी की.
सिद्धार्थ ने बताया कि उनके पास तैयारी के लिए सिर्फ एक रात थी. ऐसे में उन्होंने और राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने साथ बैठकर संभावित सवालों और उनके जवाबों पर चर्चा की. दिलचस्प बात यह थी कि दोनों ने रात में खाना बनाते हुए इस सीन की तैयारी की. इस दौरान उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि रेडियो स्टेशन वाले सीन में किस तरह की बातचीत हो सकती है और सिद्धार्थ के किरदार को किन सवालों का जवाब देना होगा. इस तरह शूटिंग से ठीक पहले बदले गए क्लाइमैक्स को तैयार किया गया.